
भारत समेत 10 देशों पर मंडराया 100% ट्रंप टैरिफ का खतरा, photo source@ChatGpt
India US Trade Relations: रूस पर आर्थिक शिकंजा कसने के लिए अमेरिका ने सीनेटर लिंडसे ग्राहम के 'सैंक्शनिंग रूस एक्ट' पर एक और अहम कदम बढ़ाया है। सीनेट से पहले ही पास हो चुके इस विधेयक को अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में पेश कर दिया गया है। विधेयक में रूस से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, फिलहाल भारत पर कोई नया 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है।
प्रतिनिधि सभा में पेश किए गए संशोधन में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, यूएई, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिस्तान को विशेष रूप से सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रावधान के तहत यदि ये देश रूस से तेल या गैस खरीदना जारी रखते हैं, या रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में उसकी किसी तरह से मदद करते हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को इन देशों के उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है।
भारत रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीदता रहा है, जो भारतीय रिफाइनरियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ है। ऐसे में अगर भविष्य में यह 100 प्रतिशत टैरिफ प्रावधान लागू होता है और भारत इसकी चपेट में आता है, तो भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में निर्यात करना काफी महंगा हो सकता है। इसके साथ ही रूस से तेल आयात जारी रखने के भारत के फैसले पर भी अमेरिकी दबाव और बढ़ने की आशंका है।
लिंडसे ग्राहम के नेतृत्व में तैयार किए गए इस रूस प्रतिबंध विधेयक को अमेरिकी सीनेट ने पहले ही 86-11 वोटों के भारी बहुमत से मंजूरी दे दी थी। इस विधेयक का मुख्य मकसद यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, साथ ही उन देशों को भी निशाने पर लेना है जो रूस के ऊर्जा कारोबार से जुड़े हुए हैं। अब आगे की प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधि सभा में इस विधेयक और इसमें प्रस्तावित संशोधनों पर विस्तृत चर्चा और वोटिंग होनी है।
फिलहाल यह विधेयक कानून बनने से काफी दूर है। प्रतिनिधि सभा में चर्चा और संशोधनों पर वोटिंग के बाद इसे पूरे सदन से मंजूरी लेनी होगी। अगर हाउस ने सीनेट के मसौदे से अलग कोई बदलाव किया, तो दोनों सदनों को एक ही अंतिम मसौदे पर सहमति बनानी होगी। इसके बाद यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा, तभी जाकर यह कानून का रूप ले पाएगा और प्रस्तावित टैरिफ लागू करने का रास्ता खुलेगा।
Updated on:
16 Sept 2026 05:51 am
Published on:
16 Sept 2026 05:51 am
