रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जिस दौरान पाकिस्तान युद्धविराम की मध्यस्थता करने का दावा कर रहा था, उसी दौरान उस पर नूर खान एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों को शरण देने का आरोप भी लगा। हालांकि पाकिस्तान ने इस आरोप को खारिज करते हुए सफाई दी कि वे विमान अमेरिका के साथ शांति वार्ता से जुड़े राजनयिक कर्मियों को लेकर आए थे, लेकिन इस स्पष्टीकरण पर संदेह बरकरार है। विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध से पहले भी ईरान अपने सैन्य साजो-सामान को हमलों से बचाने के लिए पड़ोसी देशों, खासकर अफगानिस्तान, का इस्तेमाल करता रहा है।