
Hormuz Shipping Routes: ईरान और ओमान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही के लिए नए प्रवेश और निकास मार्गों का खाका तैयार कर लिया है। इस समझौते का सबसे बड़ा पहलू यह है कि प्रस्तावित व्यवस्था का अहम हिस्सा ईरानी क्षेत्रीय जल से होकर गुजरेगा। तेहरान ने साफ कर दिया है कि इसे हॉर्मुज के दोबारा खुलने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अब इस प्रस्ताव को खाड़ी देशों के सामने रखा जाएगा, जिससे अमेरिका की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच लंबे दौर की तकनीकी और कूटनीतिक बातचीत के बाद अहम सहमति बनी है। ईरान के वार्ता दल के करीबी एक सूत्र के हवाले से अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी (Tasnim News Agency) ने बताया कि दोनों देशों ने जहाजों के लिए नए एंट्री और एग्जिट रूट की विस्तृत व्यवस्था पर सहमति बनाई है।
प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक खाड़ी में जाने वाला मार्ग पूरी तरह ईरान के क्षेत्रीय जल के भीतर होगा। निकासी मार्ग का एक हिस्सा भी ईरानी समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरेगा। यानी नई व्यवस्था लागू होने पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का बड़ा हिस्सा तेहरान द्वारा तय नियमों के तहत संचालित होगा।
इस योजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू दक्षिणी समुद्री मार्ग है। ईरानी सूत्र के अनुसार नया सिस्टम शुरू होते ही यह रास्ता बंद रहेगा। यही बिंदु अमेरिका और ईरान के रुख के बीच सबसे बड़ा टकराव बन सकता है, क्योंकि वॉशिंगटन दक्षिणी मार्ग को खुला रखने पर जोर देता रहा है।
हालांकि तेहरान ने इस समझौते को हॉर्मुज के तत्काल पुनः खुलने से जोड़ने से इनकार किया है। ईरान का कहना है कि जलमार्ग खोलने के लिए उसने अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। जब तक इन शर्तों पर अमल नहीं होता, आवाजाही पर मौजूदा प्रतिबंध जारी रहेंगे। इसका अर्थ है कि हॉर्मुज का भविष्य केवल तकनीकी व्यवस्था पर नहीं, बल्कि अमेरिका के अगले कदम पर भी निर्भर करेगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि खाड़ी से जुड़े देशों के विदेश मंत्री ओमान में बैठक करेंगे। इसमें ईरान-ओमान वार्ता के नतीजों और जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग तय करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। बैठक में खाड़ी देशों के साथ ईरान और इराक के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद भी जताई गई है।
दरअसल, हॉर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री गलियारा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इसकी भूमिका इतनी महत्वपूर्ण है कि यहां लंबे समय तक तनाव रहने पर तेल और गैस बाजारों में कीमतों तथा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। ईरान और ओमान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों पर स्थित तटीय देश हैं और समुद्री सुरक्षा व नौवहन को लेकर लगातार संपर्क में रहे हैं।
फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद तेहरान ने हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी थी। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य और समुद्री तनाव और बढ़ गया। अब ईरान-ओमान की नई व्यवस्था यह संकेत देती है कि तेहरान जलमार्ग के संचालन में अपनी निर्णायक भूमिका बनाए रखते हुए किसी नियंत्रित और शर्तों पर आधारित समुद्री आवाजाही का विकल्प तैयार कर रहा है।