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ईरान ने दी चेतावनी – ‘अगर हम तेल नहीं बेच पाए, तो कोई नहीं बेच पाएगा’

Iran-US Conflict: ईरान और अमेरिका के बढ़ते तनाव के बीच मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने बड़ी चेतावनी दे दी है। क्या कहा गालिबफ ने? आइए नज़र डालते हैं।
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Updated: 23 Jul 2026, 1:21 AM IST
Mohammad Bagher Ghalibaf
मोहम्मद बाघेर गालिबफ (File Photo/@mb_ghalibaf)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच सीज़फायर खत्म होने के साथ ही शांति समझौता भी रद्द हो गया है। दोनों पक्षों की तरफ से हमलों का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है जिससे तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आदेश पर अमेरिकी नेवी ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी फिर से लगा दी है। इसी बीच ईरानी संसद के स्पीकर और देश के मुख्य वार्ताकारों में से एक मोहम्मद बाघेर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने बड़ी चेतावनी दी है।

"अगर हम तेल नहीं बेच पाए, तो कोई नहीं बेच पाएगा"

गालिबफ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "इस युद्ध का समीकरण साफ है: या तो सब कुछ या कुछ भी नहीं। जिस क्षेत्र में हम तेल नहीं बेच पाए, वहाँ कोई और भी तेल नहीं बेचे पाएगा। अगर हमारी सुरक्षा पक्की नहीं हुई, तो कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित नहीं रहेगा और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा अमेरिकी सेनाओं की गैर-मौजूदगी में ही है। हमने बार-बार कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट के हालात युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं लौटेंगे।"

क्या है चेतावनी की वजह?

अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों पर नेवी नाकेबंदी और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव की वजह से ईरानी तेल निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। युद्ध से पहले ईरान प्रतिबंधों को बायपास करते हुए बड़ी मात्रा में तेल का निर्यात कर रहा था, जिससे उसे काफी फायदा हो रहा था। युद्ध शुरू होने के बाद भी ईरान का तेल निर्यात जारी रहा, लेकिन पहली बार अमेरिकी नाकेबंदी के बाद से ईरान का तेल निर्यात काफी कम हो गया। अब फिर से अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से ईरान का तेल निर्यात लगभग बंद हो गया है। अमेरिकी हमलों और नाकेबंदी की वजह से खार्ग आइलैंड जैसे अन्य प्रमुख टर्मिनलों तक पहुंच पर रोक लग गई है। इससे ईरान को प्रतिदिन करीब 1.5 मिलियन बैरल तेल का मार्केट खोना पड़ रहा है, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है। तेल राजस्व ईरान की जीडीपी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। इससे ईरान के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आ गई है, बजट घाटा बढ़ रहा है, मुद्रास्फीति और गरीबी में वृद्धि हो रही है। अगर लंबे समय तक अमेरिकी नाकेबंदी बनी रही तो ईरान के तेल उद्योग और अर्थव्यवस्था पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।