
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच 28 फरवरी को शुरू हुआ युद्ध करीब 40 दिन चला जिसके बाद दोनों देशों में सीज़फायर लागू हो गया। हालांकि इसके बाद भी समय-समय पर दोनों पक्षों का एक-दूसरे पर हमले करने का सिलसिला नहीं थमा। दोनों देशों के बीच शांति समझौता होने के बाद लग रहा था कि युद्ध का स्थायी अंत हो गया, लेकिन फिर भी शर्तों के उल्लंघन के मामले देखने को मिले, जिसके हमलों का सिलसिला खत्म नहीं हुआ। कुछ दिन पहले ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हमला करने के बाद अमेरिका ने मंगलवार और बुधवार को ईरान में कई जगह पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी कुवैत (Kuwait) और बहरीन (Bahrain) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों समेत कई जगहों पर हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सीज़फायर और शांति समझौते के खत्म होने का ऐलान किया लेकिन यह भी बताया कि बातचीत जारी रहेगी। इसी बीच अब ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ने एक बड़ा खुलासा किया है।
ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री माजिद इब्न अल-रेज़ा (Majid Ibn al-Reza) ने जानकारी दी कि टेक्नोलॉजी में ईरान के निवेश की वजह से युद्ध के दौरान देश को अपनी ड्रोन प्रोडक्शन क्षमता को तीन गुना बढ़ाने में कामयाबी मिली। अल-रेज़ा ने बताया कि हाल ही में हुए युद्ध के दौरान यह बात साफ हो गई कि ईरानी एक्सपर्ट्स और एडवांस टेक्नोलॉजी में निवेश देश की रक्षा शक्ति के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जब युद्ध के चरम पर था, उस दौरान न सिर्फ ईरान ने अपना डिफेंस प्रोडक्शन जारी रखा , बल्कि ड्रोन प्रोडक्शन को भी तेज़ी से बढ़ाते हुए तीन गुना कर दिया।
ओमान (Oman) में आज ईरानी और ओमानी प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई। ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) भी इसमें शामिल हुए। अमेरिका के अनुसार ईरान के साथ भविष्य में डिप्लोमेसी के लिए आज ओमान में हुई बातचीत काफी अहम थी। इसी बीच कतर (Qatar) से मध्यस्थों की टीम भी ईरान पहुंची है। पाकिस्तान (Pakistan) समेत अन्य मध्यस्थ देश भी फिर से ईरान और अमेरिका के बीच सीज़फायर लागू करवाने का प्रयास कर रहे हैं।