
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच अभी भी कोई डील नहीं हुई है जिससे दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बरकरार है। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर भी दोनों देश आमने-सामने हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस मामले में ओमान (Oman) को धमकी दी है कि अगर ओमान होर्मुज और ईरान से डील के मामले में अमेरिका के रास्ते में आया, तो वह बमबारी करने से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप ने यह दावा भी किया है कि ईरान और अमेरिका के बीच बैकचैनल के ज़रिए बातचीत चल रही है। उनके इस दावे पर ईरान की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आ गई है।
ट्रंप के दावे को आईआरजीसी - इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC - Islamic Revolutionary Guard Corps) ने खारिज कर दिया है। आईआरजीसी प्रवक्ता हुसैन मोहेबी (Hossein Mohebi) ने इस बारे में ईरानी मीडिया एजेंसी से बात करते हुए कहा, "आईआरजीसी अधिकारियों और अमेरिकियों के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। ट्रंप का यह झूठ, युद्ध में हार और निराशा की वजह से उन्हें हो रहे भ्रम और बुरे ख्यालों की उपज है।"
मोहेबी ने कहा, "ट्रंप दुनियाभर में तेल और ऊर्जा की कीमतों को कुछ समय के लिए नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके सामने सिर्फ एक ही वास्तविक रास्ता है और वो है हार स्वीकार करना और ईरान द्वारा तय की गई शर्तों को लागू करना।"
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और ओमान, जो अमेरिका का सहयोगी देश है, पर बमबारी की धमकी देना इसका बड़ा उदाहरण है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि इस रणनीतिक जलमार्ग ओर अमेरिकी नेवी का कंट्रोल है, जिसके जवाब में ईरानी सैन्य अधिकारी और प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफ़ाघारी (Ebrahim Zolfaghari) ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट पर पहले की तरह ईरान का पूरी तरह कंट्रोल बताया है। इसके बाद ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को जल्द ही अमेरिका का हिस्सा बनाने की घोषणा भी की है, जिसके जवाब में ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी (Kazem Gharibabadi) ने साफ कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट पर न तो ट्वीट से, न एयरक्राफ्ट कैरियर से, न आदेश जारी करके और न ही चुनावी भाषण से कब्ज़ा किया जा सकता है। ईरान न तो धमकियों से डरता है और न ही ताकत के दिखावे से घबराता है।