US-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष जारी है। इस तनाव के बीच स्पेन ने इजरायल में बड़ी कूटनीतिक कार्रवाई की है।
US-Israel and Iran Conflict: ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच स्पेन ने बड़ा कदम उठाया है। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष की वजह से स्पेन ने इजरायल से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है। स्पेन के सरकारी बुलेटिन में इसकी पुष्टि की है। स्पेन द्वारा जारी सूचना में कहा गया कि 11 मार्च 2026 को स्पेन ने गाजा और ईरान में जारी सैन्य कार्रवाइयों के विरोध में इजरायल से अपनी राजदूत एना मारिया सालोमन पेरेज को आधिकारिक रूप से वापस बुला लिया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज द्वारा इजरायल के कार्यों की कड़ी निंदा और द्विपक्षीय तनाव के बाद लिया गया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, तेल अवीव में स्पेन के दूतावास का नेतृत्व एक चार्ज डी' अफेयर्स करेंगे।
स्पेन की राजदूत एना मारिया सालोमन जुलाई 2021 से इजरायल में तैनात थीं। इजरायल और स्पेन के आपसी कूटनीतिक तनाव की वजह से सरकार ने उन्हें सितंबर में परामर्श के लिए वापस बुलाया था। यह कदम मैड्रिड द्वारा स्पेन के खिलाफ अपमानजनक आरोपों और स्पेन की श्रम मंत्री योलान्डा डियाज के खिलाफ इजरायल द्वारा की गई आपत्तिजनक कार्रवाई के बाद उठाया गया था। कुछ वर्षों से स्पेन और इजरायल के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। वर्तमान में मैड्रिड में इजरायल का कोई भी राजदूत नहीं है। इसकी वजह है कि मैड्रिड द्वारा फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देने के बाद 2024 में पूर्व राजदूत के पद छोड़ने के बाद से उसके दूतावास का नेतृत्व एक चार्ज डी 'अफेयर्स' कर रहे हैं।
स्पेन ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले की निंदा की थी। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज यूरोप के उन गिने-चुने वामपंथी नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले की निंदा की थी। उन्होंने ईरान पर हुए हमले को अन्यायपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा था कि मैड्रिड का रुख युद्ध के खिलाफ है।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की सरकार समय-समय पर इजरायल की कार्रवाई के खिलाफ बयान जारी कर चुकी है। पेड्रो सांचेज कुछ यूरोपीय देशों में से हैं, जिन्होंने गाजा में इजरायल की कार्रवाई की लगातार निंदा की है। पेड्रो सांचेज के नेतृत्व में स्पेन की संसद में इजरायल पर पूर्ण शस्त्र प्रतिबंध को कानून में शामिल करने की मंजूरी मिल चुकी है।
स्पेन और इजरायल के बीच तनाव के मुख्य कारण गाजा युद्ध, ईरान पर अमेरिका-इजरायल के सैन्य हमले और स्पेन की फिलिस्तीनी समर्थक नीतियों की वजह से है। स्पेन सरकार ने गाजा में इजरायली कार्रवाइयों को जनसंहार कहा था। इसके साथ ही इजरायल पर हथियार निर्यात पर स्थायी प्रतिबंध लगाया। इसके अलावा इजरायल जाने वाले जहाजों और विमानों को स्पेनिश बंदरगाहों व हवाई क्षेत्र का उपयोग करने से रोक दिया, जिसकी वजह से दोनों देशों के संबंधों में टकरार बढ़ी।
स्पेन ने फिलिस्तीन को राज्य के रूप में मान्यता दी और गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने के उपाय किए। स्पेन के इस कदम को भी इजरायल ने यहूदी-विरोधी बताया और स्पेनिश प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज पर एंटीसेमिटिज्म का आरोप लगाया। स्पेन ने ईरान पर हमलों के विरोध में अमेरिका को अपनी सैन्य सुविधाओं का उपयोग करने से इनकार कर दिया था। इसके जवाब में इजरायल ने स्पेनिश मंत्रियों की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिए और स्पेन को तानाशाहों का साथी बताया था।