
अमेरिका (United States of America) की मल्टीनेशनल कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) ने करीब 76 हज़ार मुकदमों को निपटाने के लिए 5.5 बिलियन डॉलर (लगभग 52 हजार करोड़ रुपए) तक देने की पेशकश की है। इन मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के बेबी पाउडर और टैल्कम वाले दूसरे उत्पादों से ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) होता है। हालांकि कंपनी ने इन आरोपों से इनकार किया है। साथ ही कंपनी ने अपने मशहूर बेबी पाउडर का फॉर्मूला भी बदल दिया है।
अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन पिछले कई साल से कानूनी पचड़ों में फंसी है। कंपनी के लिटिगेशन मामलों के वाइस प्रेसिडेंट एरिक हास ने कहा कि जॉनसन एंड जॉनसन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और कंपनी मुकदमेबाजी को हमेशा के लिए सुलझाने के मकसद से समझौता करने को तैयार है।
जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ 2009 से ही मुकदमे शुरू हो गए थे। करीब 17 साल से कंपनी इन मुकदमों का सामना कर रही है। कंपनी के मुआवजे से पाउडर से जुड़े ज़्यादातर दावें कवर हो जाएंगे। कंपनी के मुआवजे से पाउडर से जुड़े ज़्यादातर दावें कवर हो जाएंगे जिससे जॉनसन एंड जॉनसन को कुछ राहत मिल सकती है।
अब क्या है उम्मीद?
कंपनी ने कहा कि प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले उसे उन कानूनी फर्मों की मंजूरी मिलनी चाहिए जो ओवेरियन कैंसर के 95% दावों का प्रतिनिधित्व कर रही है। हास ने उम्मीद जताई कि इस समाधान के बाद कंपनी जीवन रक्षक दवाएं और उपकरण विकसित करने के मिशन पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जॉनसन एंड जॉनसन दवाओं, स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी चीज़ें और बच्चों के अन्य प्रोडक्ट्स भी बनाती है।
टैल्क मैग्नीशियम, सिलिकॉन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से बना होता है। यह साबुन जैसा लगता है और एस्बेस्टस की खानों के पास मिलता है। एस्बेस्टस के कारण कैंसर का खतरा रहता है। टैल्क का बेबी पाउडर में इस्तेमाल किया जाता है। ग्राहकों का कहना है कि एस्बेस्टस की मिलावट के कारण कंपनी के टैल्क प्रोडक्ट से कैंसर हुआ था। इसी वजह से कंपनी को मुकदमे झेलने पड़ रहे हैं।