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मसूद पेज़ेशकियान ने मुस्लिम देशों से की अपील, अमेरिका-इज़रायल की आक्रामकता के खिलाफ हो एकजुट

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने अमेरिका-इज़रायल की आक्रामकता के खिलाफ मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील की है।
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Updated: 26 Oct 2026, 8:07 PM IST
Masoud Pezeshkian
मसूद पेज़ेशकियान (Photo - ANI)

ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान में आज ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान (Masoud Pezeshkian) ने सऊदी अरब (Saudi Arabia) के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान (Khalid bin Salman), पाकिस्तान (Pakistan) के सेना प्रमुख आसिम मुनीर (Asim Munir) और तुर्की (Turkey) के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन (Ibrahim Kalin) के साथ मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मुस्लिम देशों से एक बड़ी अपील की।

अमेरिका-इज़रायल की आक्रामकता के खिलाफ एकजुट होने की अपील

पेज़ेशकियान ने मुस्लिम देशों से अपील की है कि उन्हें अमेरिका (United States of America) और इज़रायल (Israel) की आक्रामकता के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ये दोनों देश मिडिल ईस्ट को बांटने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे में मुस्लिम देशों को एकजुट होकर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान मुस्लिम देशों के बीच एकता, सुरक्षा और विकास को मजबूत करने में सहयोग देने के लिए तैयार है। पेज़ेशकियान ने साफ कर दिया कि ईरान किसी भी ऐससे विचार का समर्थन करता है जिससे मुस्लिम देशों के बीच एकता आए। उनका मानना है कि अपनी साझा क्षमताओं के दम पर मुस्लिम देश दुनिया के सामने न्याय और विकास का एक मॉडल पेश कर सकते हैं।

अमेरिकी-इज़रायली हमलों की निंदा

पेज़ेशकियान ने गाज़ा, लेबनान, ईरान और मिडिल ईस्ट के अन्य हिस्सों पर हुए इज़रायली हमलों की निंदा की। उन्होंने ईरान पर अमेरिकी हमलों की भी निंदा की।

परमाणु प्रोग्राम पर भी कही बात

ईरानी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता, लेकिन 'परमाणु अप्रसार संधि' (NPT) के तहत शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों को जारी रखने के अपने अधिकार पर जोर देता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और इज़रायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने शुरू से ही कहा है कि वो ईरान के परमाणु प्रोग्राम के खिलाफ हैं और ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने नहीं देंगे क्योंकि अगर ऐसा हुआ, तो यह इज़रायल के साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा होगा। ईरान के खिलाफ युद्ध की एक बड़ी वजह ईरानी परमाणु प्रोग्राम ही थी। वहीँ ईरान का इस मामले पर रुख हमेशा से ही साफ रहा है कि उसे परमाणु हथियार नहीं बनाना, लेकिन अपने देशवासियों की भलाई के लिए परमाणु शक्ति का विकास करना है।