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‘इज़रायल में चुनावी नतीजों से ईरान को नहीं पड़ता कोई फर्क’, इस्माइल बघाई की दो-टूक

क्या इज़रायल में चुनावी नतीजों का ईरान पर कोई फर्क पड़ेगा? इस मामले में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बड़ा बयान दिया है।
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भारत

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Tanay Mishra

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Updated: 26 Oct 2026, 3:54 PM IST

Esmaeil Baghaei

इस्माइल बघाई (Photo - ANI)

इज़रायल (Israel) में 27 नवंबर को चुनाव है। अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) खुलकर वर्तमान इज़रायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) का समर्थन कर चुके हैं। गाज़ा (Gaza) और लेबनान (Lebanon) में सैन्य कार्रवाई और ईरान (Iran) से तनाव के बीच चुनाव में नेतन्याहू की असली परीक्षा होगी। चुनाव से पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmaeil Baghaei) ने बड़ा बयान दिया है।

"इज़रायल में चुनावी नतीजों से ईरान को नहीं पड़ता कोई फर्क"

बघाई ने आज, सोमवार, 26 अक्टूबर को अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि इज़रायल में होने वाले आगामी चुनाव के नतीजों से ईरान को कोई फर्क नहीं पड़ता। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इज़रायल के राजनीतिक गुटों के बीच चल रही इस चुनावी जंग की तुलना 1964 की व्यंग्यात्मक फिल्म डॉ. स्ट्रेंजलव (Dr. Strangelove) से की, जो परमाणु तबाही के खतरे पर आधारित थी।

इज़रायल को दिया जवाब

बघाई ने अपने इस बयान के साथ इज़रायल को जवाब भी दे दिया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान और उसके सहयोगी संगठन इज़रायल में होने वाले चुनाव में बाधा डालने और नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। नेतन्याहू ने ईरान को चेतावनी देते हुए ऐसा न करने की बात कहीं और कहा कि अगर ईरान ने इज़रायल की चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए कुछ भी किया, तो उसे इसका परिणाम भुगतना होगा। इसके जवाब में ही बघाई ने कहा कि इज़रायल में चुनावी नतीजों से ईरान को कोई फर्क नहीं पड़ता।

"अलग-अलग दलों के बीच ज़्यादा बुराई करने की होड़"

बघाई ने आगे कहा, "मुझे नहीं लगता कि इज़रायल में कोई चुनाव होने वाला है। वहाँ डॉ. स्ट्रेंजलव फिल्म की तरह ही अलग-अलग दलों के बीच ज़्यादा बुराई करने की होड़ मची है। दूसरे शब्दों में कहें तो यह अलग-अलग लोगों के बीच ज़्यादा हत्याएं करने की प्रतियोगिता है। ऐसे माहौल और चुनाव में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इज़रायल के शासन की बागडोर किसके हाथ में जाती है, जिसका इतिहास हमारे क्षेत्र में केवल हत्याओं और हिंसा से भरा रहा है। पिछले 80 वर्षों से फिलिस्तीनियों का नरसंहार जारी है। इज़रायली शासन का दूसरों को धमकाना और हताशा में ऐसी बयानबाजी करना, इसी शासन की बुराई का एक हिस्सा है।"