बलूच नेता मीर यार बलूच ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखा है। क्या है इस पत्र में? आइए जानते हैं।
बलूचिस्तान (Balochistan) में लगातार अस्थिरता बढ़ रही है और प्रांत के नेता और जनता पाकिस्तान (Pakistan) से आज़ादी की मांग कर रहे हैं। ज़्यादातर बलूच लोग खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते और बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आज़ाद कराकर स्वतंत्र देश बनाने की मांग कर रहे हैं। बलूच नेता मीर यार बलूच (Mir Yar Baloch) तो ऐलान कर चुके हैं कि बलूचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। मीर समेत सभी बलूच नेता दुनियाभर से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच अब मीर ने भारत (India) के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) को पत्र लिखा है।
मीर ने सोशल मीडिया पर भी इस पत्र की तस्वीर शेयर की है और इस पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और बलूच नेता हिर्बयर मर्री (Hyrbyair Marri) को भी टैग किया है। इस पत्र में मीर ने लिखा…
"माननीय डॉ. जयशंकर जी,
बलूचिस्तान गणराज्य के 6 करोड़ देशभक्त नागरिकों की ओर से हम भारत के 140 करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी सम्मानित लोगों को नए साल 2026 की हार्दिक और सच्ची बधाई देते हैं। यह शुभ अवसर उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक, आर्थिक, कूटनीतिक, रक्षा और बहुआयामी संबंधों पर सोचने और उनका जश्न मनाने का मौका देता है, जिन्होंने सदियों से भारत और बलूचिस्तान को जोड़ा है। इन स्थायी संबंधों की मिसाल हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसी पवित्र जगहें हैं, जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक संबंधों के हमेशा रहने वाले प्रतीक हैं।
हम पिछले साल मोदी सरकार द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए किए गए साहसिक और पक्के कदमों की तारीफ़ करते हैं, खासकर पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान द्वारा मदद किए गए आतंकवाद के ठिकानों को निशाना बनाना और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ़ कार्रवाई करना। यह कदम बहुत हिम्मत और क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के प्रति पक्के इरादे को दिखाते हैं।
बलूचिस्तान के लोग पिछले 79 सालों से पाकिस्तान के सरकारी कब्ज़े, सरकार के प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को झेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि इस बढ़ती हुई बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि हमारे देश के लिए हमेशा शांति और संप्रभुता पक्की हो सके।
बलूचिस्तान के लोगों की ओर से, हम भारत और उसकी सरकार को दोस्ती, विश्वास और आपसी हितों को बढ़ावा देने में अपना पक्का समर्थन देते हैं, जिसमें शांति, खुशहाली, विकास, व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, भविष्य की एनर्जी चुनौतियों और छिपे हुए खतरों को कम करना शामिल है।
अब समय की मांग है कि ठोस, आपसी सहयोग को अपनाया जाए। भारत और बलूचिस्तान के सामने जो खतरे हैं, वे असली और आने वाले हैं; इसलिए, हमारे आपसी रिश्ते भी उतने ही ठोस और कार्रवाई लायक होने चाहिए।
बलूचिस्तान गणराज्य पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते स्ट्रेटेजिक गठबंधन को बहुत खतरनाक मानता है। हम चेतावनी देते हैं कि चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को उसके आखिरी दौर में पहुंचा दिया है। अगर बलूचिस्तान की रक्षा और आज़ादी की ताकतों की काबिलियत को और मज़बूत नहीं किया गया और अगर उन्हें पुराने पैटर्न की तरह नज़रअंदाज़ किया जाता रहा, तो यह सोचा जा सकता है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है। 6 करोड़ बलूच लोगों की मर्ज़ी के बिना बलूचिस्तान की ज़मीन पर चीन के सैनिकों की मौजूदगी, भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक ऐसा खतरा और चुनौती होगी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
हम अपने दो महान देशों के बीच मज़बूत सहयोग की उम्मीद करते हैं।
भवदीय,
मीर यार बलूच,
बलूच प्रतिनिधि
बलूचिस्तान गणराज्य"