विदेश

तनाव के बीच ईरान से बड़ी खबर, अपने पिता के अंतिम संस्कार में नहीं शामिल होंगे मुजतबा खामेनेई

ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उनके बेटे मुजतबा खामेनेई शामिल नहीं होंगे।
2 min read
Jul 02, 2026
Mojtaba Khamenei
मोजतबा खामेनेई

Mojtaba Khamenei: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़ा घटनाक्रम सामने आया है। उनके बेटे मुजतबा खामेनेई के अंतिम संस्कार में सार्वजनिक रूप से शामिल न होने की जानकारी दी गई है। यह फैसला सुरक्षा कारणों के चलते लिया गया है क्योंकि ईरान और इजरायल के बीच तनाव अभी भी चरम पर बना हुआ है।

ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि और करीबी आयतुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि मौजूदा हालात में मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा सुनिश्चित करना संभव नहीं है, इसलिए उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है।

सुरक्षा कारणों से लिया गया बड़ा फैसला

हकीम इलाही ने कहा कि मुजतबा खामेनेई खुद लोगों से मिलना चाहते हैं और अंतिम संस्कार में शामिल होना भी चाहते हैं लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इसकी अनुमति नहीं दी है। उन्होंने बताया कि ईरान में मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता। उनके मुताबिक स्थिति बहुत खतरनाक है और हम उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते इसलिए उन्हें बाहर आने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

ईरान में बड़े पैमाने पर शोक कार्यक्रम

अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद पूरे ईरान में शोक की लहर है। देशभर में कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार और शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। तेहरान समेत कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। इसे इस्लामिक गणराज्य के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जा रहा है।

धार्मिक और राजनीतिक रूप से जुड़े इन कार्यक्रमों में बड़ी भीड़ जुटने की संभावना है जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है।

ईरान-इजरायल तनाव के बीच बढ़ी संवेदनशीलता

यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ है। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां किसी भी बड़े सार्वजनिक व्यक्ति की गतिविधियों को लेकर बेहद सतर्क हैं। मुजतबा खामेनेई को लेकर लिया गया यह फैसला भी इसी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की अप्रत्याशित घटना से बचा जा सके।

ईरान के अंदर और बाहर दोनों जगह यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि अंतिम संस्कार जैसे बड़े आयोजन में उनकी अनुपस्थिति को अहम राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।