विदेश

पाकिस्तान में तक्षशिला से मिले दुर्लभ सिक्के, सजावटी पत्थर, पुरातत्वविदों ने बताया अहम खोज

पाकिस्तान के तक्षशिला में पुरातत्वविदों को मिली बड़ी सफलता। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर हुई खुदाई में सम्राट वासुदेव काल के सिक्के और छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सजावटी पत्थर बरामद हुए हैं। जानें कैसे यह खोज प्राचीन गंधार सभ्यता के रहस्यों से पर्दा उठा रही है।
less than 1 minute read
Jan 04, 2026
AI Generated Image
AI Generated Image

पाकिस्तान में पुरातत्वविदों ने ऐतिहासिक शहर तक्षशिला के पास स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर खुदाई के दौरान दुर्लभ सजावटी पत्थर और प्राचीन सिक्के खोजे हैं। यह खोज प्राचीन गंधार सभ्यता की शुरुआती शहरी बसावट को समझने में बेहद अहम मानी जा रही है। यह खोज भीर टीला नामक स्थल पर हुई, जहां छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सजावटी पत्थर और दूसरी शताब्दी के कुषाण काल के सिक्के मिले हैं। यह पिछले दस वर्षों में इस स्थल पर हुई सबसे अहम खोज है। सजावटी पत्थर एक कीमती नीला अर्ध-कीमती पत्थर है, जबकि कांस्य सिक्के कुषाण वंश के हैं।

सिक्कों पर सम्राट वासुदेव और देवी के चित्र

पंजाब प्रांत के पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक आसिम डोगर ने बताया कि सिक्के कुषाण सम्राट वासुदेव के समय के हैं, जिन्हें कुषाण शासकों में अंतिम महान सम्राट माना जाता है। सिक्कों के एक तरफ सम्राट वासुदेव की आकृति बनी है और दूसरी तरफ एक देवी की छवि है, जो उस दौर की धार्मिक विविधता और सहिष्णुता को दर्शाती है। ये अवशेष स्थल के उत्तरी हिस्से में बी-2 ट्रेंच से मिले हैं, जो उस समय का एक रिहायशी इलाका था।

तक्षशिला के स्वर्णिम इतिहास की झलक

इन खोजों से यह साबित होता है कि कुषाण शासन के दौरान, खासकर पहली से तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच तक्षशिला राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से अपने शिखर पर था। कनिष्क महान जैसे शासकों के समय तक्षशिला एक बड़ा प्रशासनिक, व्यापारिक और शैक्षणिक केंद्र बन गया था। इसी दौर में गंधार कला का विकास हुआ, जिसमें ग्रीक, रोमन, फारसी और भारतीय कला शैलियों का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है।

Updated on:
04 Jan 2026 02:40 am
Published on:
04 Jan 2026 02:40 am