
तुर्की (Turkey) में 7-8 जुलाई को नाटो समिट (NATO Summit) का आयोजन होगा। यह आयोजन देश की राजधानी अंकारा (Ankara) में होगा और नाटो के सभी सदस्य देशों के अध्यक्षों के साथ ही इसके महासचिव समेत अन्य अधिकारी भी इस दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। अमेरिका (United States of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) भी इसमें शामिल होंगे। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति के करीबी सूत्रों का मानना है कि वह सिर्फ तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdoğan) के साथ अच्छे संबंधों की वजह से ही इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अंकारा जाएंगे।
ईरान से युद्ध (War Against Iran) के बाद अमेरिका के नाटो देशों के साथ गहरे हुए मतभेदों के बीच यह पहला सम्मेलन है। गौरतलब है कि ईरान युद्ध में नाटो देशों द्वारा मदद न मिलने पर ट्रंप काफी नाराज़ हो गए थे। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर भी नाटो देशों ने ट्रंप की कोई मदद नहीं की थी और यह बात ट्रंप को बिल्कुल पसंद नहीं आई। वह कई मौकों पर नाटो के खिलाफ जमकर बयानबाजी भी कर चुके हैं।
नाटो के आगामी समिट में बीते वर्ष नीदरलैंड (Netherlands) के हेग (Hague) में हुए समझौते को लागू करने पर चर्चा हो सकती है। इसमें सहयोगी देशों को अपना रक्षा खर्च 2035 तक जीडीपी का 5% तक बढ़ाना था। ट्रंप इसे लेकर कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि अगर साथी देश रक्षा खर्च नहीं बढ़ाते हैं तो वह उनके लिए अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर फिर से सोचेंगे। गौरतलब है कि नाटो देशों में सबसे ज़्यादा रक्षा खर्च अमेरिका का ही है और ट्रंप का मानना है कि दूसरे सदस्य देश अमेरिका का फायदा उठाते हैं जो सही नहीं है। इसी वजह से वह चाहते हैं कि अन्य सदस्य देश भी अपना रक्षा खर्च बढ़ाएं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ट्रंप एजेंडा सेट कर रहे हैं। उन्होंने यूरोपीय देशों में अमेरिकी सैनिकों की संख्या भी कम करनी शुरू कर दी है।
नाटो समिट से पहले अंकारा में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ तुर्की ने नाटो के विरोध में प्रदर्शन किया। ऐसे में पुलिस ने 100 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया।