विदेश

Nepal Flash Flood: एक घर से 23 शव, 4000 लापता, नेपाल में बाढ़ के बाद अब महामारी का साया

Nepal Flood:नेपाल में बाढ़ को एक हफ्ता बीता, अब तक 962 शव बरामद, 4000 लापता। एक घर से मिले 23 शव, गंडक नदी में भी मिले शव। जानें रेस्क्यू ऑपरेशन का पूरा हाल।
2 min read
Sep 01, 2026
Nepal flood
नेपाल में बाढ़ का कहर। त्रासदी का फोटो। (सोर्स: आईएएनएस)

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। मलबे में दबे लोगों को खोजने का काम लगातार जारी है। रेस्क्यू में जुटी टीमों के मुताबिक अब तक करीब 962 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब चार हजार लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। आज नुवाकोट में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचाव दल को खौफनाक मंजर का सामना करना पड़ा। वेत्रवंती इलाके में एक ही घर से 23 शव निकाले गए।

गंडक नदी में भी 23 शव मिले

वहीं, नेपाल के भोटेकोसी में आई बाढ़ का असर अब भारत तक भी पहुंचा है। भारतीय क्षेत्र से गुजरने वाली गंडक नदी में भी 23 शव मिले हैं, जिन्हें भारतीय अधिकारी नेपाली एजेंसियों को सौंपने की प्रक्रिया में हैं। नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे अधिकारियों के मुताबिक, लापता लोगों की सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति रसुवा जिले के उत्तरगया गांव में है, जहां लगभग 350 छात्र अब भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर परियोजना में करीब 40-42 इंजीनियर फंसे होने की आशंका है। छह दिन बीत जाने के बाद भी वहां रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका है। इसी तरह त्रिशूली 3B परियोजना में भी 118 लोगों, जिनमें इंजीनियर, अधिकारी और मजदूर शामिल हैं। उनसे कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका है।

प्राकृतिक आपदा के एक सप्ताह बाद अब नई चुनौती सामने खड़ी है। मलबे और दलदल में दबे शव अब सड़ने लगे हैं। दुर्गंध से अब इलाके में महामारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है। रेस्क्यू टीम के सामने अब सफाई और बीमारी रोकने का अतिरिक्त दबाव भी बन गया है।

भूमिगत पावर हाउस तक पहुंचना संभव नहीं हो सका

नेपाल की आधिकारिक आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, अब तक 900 से ज्यादा मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि चार हजार से अधिक लोगों से संपर्क टूटा हुआ है। इस बीच रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर परियोजना की प्रबंधन कंपनी ने बताया कि सेना की टीम परियोजना की सुरंग तक तो पहुंच गई थी, लेकिन भूमिगत पावर हाउस तक पहुंचना संभव नहीं हो सका।

कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि बचावकर्मी सुरंग के उस हिस्से तक गए जहां रास्ता महज एक-दो फीट खुला था, लेकिन आगे सुरंग पूरी तरह बंद मिली। वहां आगे बढ़ने के लिए ड्रिलिंग मशीनों समेत भारी उपकरणों की जरूरत थी, जो उपलब्ध न होने के कारण टीम को लौटना पड़ा। अधिकारी ने सरकार से अतिरिक्त उपकरण भेजने की अपील करते हुए कहा कि यहां भी वैसी ही रणनीति अपनाई जानी चाहिए जैसी अपर त्रिशूली की दोनों परियोजनाओं में अपनाई गई थी।

इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी थी कि भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद सेना के नेतृत्व में एक विशेष दल, जिसमें इंजीनियर और ड्रोन ऑपरेटर शामिल थे। उन्होंने सुरंग के भीतरी हिस्से की तलाशी ली थी। ड्रोन के जरिए जांच करने पर सुरंग के अंतिम छोर तक कोई व्यक्ति नहीं मिला, हालांकि टीम भूमिगत पावर हाउस तक नहीं पहुंच सकी थी। राहत की खबर यह रही कि सोमवार दोपहर तक नेपाली सेना के हेलिकॉप्टरों ने भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से 1,330 लोगों को सुरक्षित बचा लिया।

Updated on:
01 Sept 2026 10:32 am
Published on:
01 Sept 2026 10:13 am