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Nepal Flood Tragedy: नेपाल की बाढ़ में लापता बेटे को खोजने निकला पिता, जेब में सिर्फ 2000 रूपये; कई दिन से पैदल भटक रहा

Nepal Flood Missing Son : सिर्फ करीब 2,000 नेपाली रुपये उधार लेकर निकला यह पिता बाढ़ प्रभावित इलाकों में बेटे की तलाश कर रहा है। रास्ते में उसे सिर्फ मलबा नहीं, बल्कि व्यवस्था की बेरुखी और सामाजिक भेदभाव का भी सामना करना पड़ रहा है।
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Sep 03, 2026
Nepal Flood Tragedy
Nepal Flood Tragedy: 19 साल का बेटा बाढ़ में गायब, पिता जेब में सिर्फ 2,000 रूपये; लेकर निकला… कई दिन से खाक छान रहा (फोटो सोर्स:@Smita Sharma/ Al Jazeera]

Nepal Flood Disaster:नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया, लेकिन कुछ लोगों के लिए त्रासदी अब भी खत्म नहीं हुई है। सप्तरी का एक गरीब पिता अपने 19 वर्षीय बेटे विनोद को खोजने के लिए कर्ज लेकर सैकड़ों किलोमीटर दूर निकल पड़ा है। अस्पतालों से लेकर मुर्दाघरों और राहत शिविरों तक तलाश के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। भूख, थकान और आर्थिक तंगी के बीच उसकी उम्मीद लगातार टूट रही है, फिर भी वह घर लौटने को तैयार नहीं।

Nepal Flood Tragedy: बाढ़ ने छीना घरों का सहारा, अब बेटे की तलाश में भटक रहा पिता

नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान के बीच एक पिता की कहानी मानवीय त्रासदी का दूसरा चेहरा सामने ला रही है। सप्तरी निवासी तालका सदा अपने इकलौते बेटे विनोद की तलाश में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। बेटे का पता लगाने के लिए उन्होंने कर्ज लिया और राजधानी काठमांडू तक पहुंचे। जब अस्पतालों में कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने पैदल ही उस इलाके की ओर रुख कर लिया, जहां विनोद काम करता था।

जलविद्युत परियोजना में मजदूरी करने गया था 19 वर्षीय विनोद

विनोद करीब एक महीने पहले रोजगार की तलाश में रसुवा जिले पहुंचा था। वहां वह एक जलविद्युत परियोजना में मजदूरी करता था। उसका काम सीमेंट मिलाने और दूसरे छोटे-मोटे श्रम कार्यों से जुड़ा था।

26 अगस्त को भोटेकोशी नदी से आई अचानक बाढ़ और उसके बाद मची तबाही ने पूरे क्षेत्र को तहस-नहस कर दिया। सड़कें, पुल, मकान, स्कूल और बिजली से जुड़ी परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। इसी आपदा के बाद विनोद से परिवार का संपर्क टूट गया। विनोद के साथ काम करने वाले चार अन्य युवा भी लापता बताए गए हैं। उनकी उम्र भी लगभग 17 से 19 वर्ष के बीच थी।

आखिरी बार बाढ़ से एक दिन पहले हुई थी बात

तालका सदा ने बेटे से आपदा आने से एक दिन पहले बात की थी। इसके बाद फोन बंद है और किसी तरह का संदेश भी नहीं मिला।

सप्तरी में परिवार उसकी खबर का इंतजार कर रहा है। पिता के मुताबिक उनकी पत्नी लगातार बेटे को वापस लाने की गुहार लगा रही हैं। तीन बेटियों के बीच विनोद उनका इकलौता बेटा है, इसलिए उसके लापता होने ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।

कर्ज लेकर निकले, हाथ में बचे थे सिर्फ करीब 2 हजार रुपये

बेटे की खोज में निकलना इस गरीब परिवार के लिए आसान नहीं था। तालका ने यात्रा का खर्च जुटाने के लिए कर्ज लिया। उनके पास मुश्किल से 2,000 नेपाली रुपये यानी करीब 13 डॉलर की रकम थी।

इस कर्ज पर उन्हें हर 100 रुपये के बदले 20 रुपये ब्याज देना है। यानी बेटे की तलाश जितनी लंबी होगी, परिवार पर आर्थिक बोझ भी उतना ही बढ़ता जाएगा।

सप्तरी से काठमांडू पहुंचने के बाद पिता और उनके भाई ने कई अस्पतालों के चक्कर लगाए। बाढ़ प्रभावित उत्तरी इलाकों से लाए गए घायलों और मृतकों के बीच उन्होंने विनोद को तलाशा। अस्पतालों में मौजूद तस्वीरों और शवों की पहचान करने की कोशिश भी की गई, लेकिन बेटे का नाम या तस्वीर कहीं नहीं मिली।

अस्पतालों से निराशा मिली तो पैदल निकल पड़े

काठमांडू से करीब 60 किलोमीटर दूर नुवाकोट की दिशा में पिता ने पैदल यात्रा शुरू कर दी। उनका लक्ष्य उस जलविद्युत परियोजना तक पहुंचना था, जहां विनोद काम करता था।

टूटी सड़कों, कीचड़ और मलबे से गुजरते हुए दोनों भाई त्रिशूली पहुंचे। बाढ़ के बाद यहां का बाजार मलबे और गाद से ढका पड़ा है। राहत और बचाव के बीच सामान्य जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त नजर आ रही है।

रात गुजारने के लिए उन्हें एक लॉज में 1,500 नेपाली रुपये खर्च करने पड़े। खाने में भी पर्याप्त भोजन नहीं मिला। पिता की चिंता साफ थी—अगर एक और रात रुकना पड़ा तो बची हुई रकम खत्म हो जाएगी और वापस घर जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं बचेंगे।

राहत शिविरों और मुर्दाघरों तक पहुंच की मांग

तालका और उनके भाई का कहना है कि वे सेना के शिविरों, राहत केंद्रों और मुर्दाघरों में जाकर बेटे की जानकारी लेना चाहते हैं। उनका आरोप है कि कई जगह उन्हें आगे जाने से रोक दिया गया।

उनका कहना है कि उन्होंने पुलिस थानों और सैन्य शिविरों में अपनी जानकारी दर्ज कराई है, लेकिन अभी तक उन्हें ठोस मदद नहीं मिल सकी।

आपदा (Nepal Flood) के दौरान जब प्रशासन पर हजारों लोगों को बचाने और लापता लोगों का पता लगाने का भारी दबाव हो, तब ऐसी शिकायतें राहत व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों को भी उजागर करती हैं।

गरीबी और पहचान का दर्द भी तलाश के साथ चल रहा

तालका सदा का परिवार तराई क्षेत्र के मुसहर समुदाय से आता है। यह समुदाय नेपाल और भारत के कुछ सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक हाशिये पर रहा है।

सदा का आरोप है कि उनकी कमजोर आर्थिक स्थिति, मधेसी पहचान और नेपाली भाषा पर सीमित पकड़ के कारण उन्हें सरकारी व्यवस्था तक पहुंच बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उनका मानना है कि पहाड़ी और तराई क्षेत्रों के बीच लंबे समय से मौजूद सामाजिक दूरी इस संकट में भी दिखाई दे रही है।

यह आरोप केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है। नेपाल में मधेसी समुदाय लंबे समय से राजनीतिक प्रतिनिधित्व, नागरिक अधिकारों और सामाजिक बराबरी से जुड़े मुद्दे उठाता रहा है। हालांकि, मौजूदा आपदा में प्रशासन के सामने बचाव कार्य का असाधारण दबाव भी है और अधिकारी सभी प्रभावित लोगों तक पहुंचने की कोशिश का दावा कर रहे हैं।

कभी उम्मीद, कभी टूटती हिम्मत

तालका जब बेटे के बारे में सोचते हैं तो उनके भीतर उम्मीद और निराशा दोनों एक साथ दिखाई देती हैं। उन्हें लगता है कि विनोद युवा है, शारीरिक रूप से मजबूत है और शायद किसी सुरक्षित जगह तक पहुंच गया हो। लेकिन दूसरी तरफ फोन से कोई संपर्क नहीं होने की बात उन्हें भीतर से तोड़ देती है।

हर बार बेटे का नंबर मिलाने पर जवाब नहीं मिलता। फिर भी वह एक और जगह तलाशने निकल पड़ते हैं। उनके लिए यह यात्रा सिर्फ एक लापता व्यक्ति की खोज नहीं, बल्कि अपने परिवार के टूटते भरोसे को बचाए रखने की कोशिश बन चुकी है।

'लाश भी होगी तो देखना हमारा अधिकार है'

सदा की सबसे बड़ी मांग सरल है अगर विनोद जीवित है तो उसका पता लगाया जाए और अगर वह नहीं रहा तो परिवार को कम से कम उसके शव की पहचान करने का मौका मिले।

यही वजह है कि भूख, कर्ज, थकान और लंबी पैदल यात्रा के बावजूद वह वापस लौटने को तैयार नहीं हैं। बेटे की तलाश उन्हें लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों की ओर खींच रही है।

लगातार मदद नहीं मिलने से उनकी नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। आखिर में उन्होंने पुलिस से सहयोग नहीं मिलने पर बेहद आक्रोशित प्रतिक्रिया दी और थाने को नुकसान पहुंचाने की धमकी तक दे डाली। यह गुस्सा उस बेबसी की तस्वीर है, जिसमें एक पिता कई दिनों से सिर्फ अपने बेटे का पता खोज रहा है।

(सोर्स: @aljazeera.com)

Updated on:
03 Sept 2026 07:42 am
Published on:
03 Sept 2026 07:42 am