वैज्ञानिकों ने कंस्ट्रक्शन के लिए कंक्रीट से भी मज़बूत पदार्थ तैयार किया है। क्या है यह नई खोज? आइए जानते हैं।
अब तक रेगिस्तान की रेत को चिकना और बारीक होने के कारण कंक्रीट बनाने के अयोग्य माना जाता था, लेकिन वैज्ञानिकों ने 'बोटैनिकल सैंड कंक्रीट' बनाकर इस धारणा को बदल दिया है। नॉर्वे और जापान के वैज्ञानिकों ने रेगिस्तानी रेत को पौधों से मिलने वाले एडिटिव्स और लकड़ी के बुरादे के साथ मिलाकर इस मिश्रण को उच्च दबाव के साथ दबाते हुए बिना सीमेंट मिलाए ठोस और मजबूत ब्लॉक तैयार किए हैं। दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन का 8% हिस्सा सीमेंट उत्पादन से आता है। यह नई तकनीक सीमेंट के उपयोग को कम कर प्रदूषण घटाएगी और नदी की रेत का विकल्प बनेगी।
इस नई तकनीक से सीमेंट का उपयोग कम होगा जिससे प्रदूषण घटेगा और नदी की रेत का विकल्प मिलेगा। पारंपरिक कंक्रीट उत्पादन में बहुत ज़्यादा कार्बन उत्सर्जन होता है, जबकि यह विधि पौधे-आधारित सामग्री पर निर्भर है और कम उत्सर्जन वाली है।
फिलहाल इस 'बोटैनिकल कंक्रीट' का उपयोग फुटपाथ, पेविंग ब्लॉक्स और छोटे निर्माणों के लिए किया जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभी ऊंची इमारतों या बहुत ठंडे इलाकों के लिए तैयार नहीं है, लेकिन इस पर रिसर्च जारी है जिससे इसे पर्याप्त मज़बूत बनाया जा सके।
रेगिस्तानी रेत प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिससे निर्माण सामग्री की कमी और महंगी आयात की समस्या कम हो सकती है। यह तकनीक रेगिस्तानी क्षेत्रों में निर्माण को सस्ता और सतत बना सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सामग्री घने और मजबूत ब्लॉक बनाती है, जो उच्च तापमान और दबाव सहन कर सकती है।