पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते का फायदा नहीं उठाया। अमेरिका ने पाकिस्तान से आयातित सामानों पर टैरिफ 29% से घटाकर 19% कर दिया था, लेकिन पाकिस्तान ने इसका लाभ नहीं उठाया। इसके बजाय, उसने अमेरिका के हितों के खिलाफ कदम उठाए, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आने का अनुमान है।
पाकिस्तान हमेशा थोड़े समय के अंतराल पर एहसान फरामोशी का उदाहरण देता रहता है। अब उसने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी घात कर दिया है। दरअसल, कुछ ही दिनों पहले ट्रंप ने पकिस्तान के लिए दिल बड़ा करते हुए टैरिफ घटाने की घोषणा की थी।
अमेरिका में पाकिस्तान से आने वाले सामानों पर 19 प्रतिशत टैरिफ वसूलने का एलान किया था। जो पहले 29 प्रतिशत था। इसके साथ, अमेरिका ने तेल व्यापार को लेकर भी पाकिस्तान के साथ बड़ी डील की थी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ है। अब पाकिस्तान ने एक तरह से अमेरिका की पीठ में छुरा घोंप दिया है।
दरअसल, ईरान पर अमेरिका ने कई तरह की पाबंदियों लगाई हैं। उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है। इस बीच, ऐसी खबर है कि पाकिस्तान ने ईरान को न्यूक्लियर प्रोग्राम में फुल सपोर्ट करने की घोषणा कर दी है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दो दिनों के लिए पास्किस्तान गए थे। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई तरह की डील हुई। पाकिस्तान और ईरान सालाना 10 अरब डॉलर तक व्यापार करने पर सहमत हुए।
इसके साथ, पाकितान ने ईरान को उनके न्यूक्लियर प्रोग्राम में पूरी तरह से सहायता करने का एलान कर दिया। जानकारी के मुताबिक, ईरान और पाकिस्तान के बीच 12 समझौतों पर सहमति बनी है।
बता दें कि अमेरिका ने कई सालों से ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। बराक ओबामा के शासन में अमेरिकी सरकार ने साल 2015 में ईरान से प्रतिबंध हटा लिए थे, लेकिन ट्रंप ने सत्ता में आते ही ईरान पर फिर से प्रतिबंध लागू कर दिए थे।
अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत, कोई भी देश या कंपनी ईरान के साथ व्यापार नहीं कर सकती है। ऐसा करने पर उन्हें भी प्रतिबंध का समाना करना पड़ेगा। इसके अलावा, ईरान के जहाज, शिपिंग और ऊर्जा निर्माण सेक्टर पर भी बैन है।
ईरान के पेट्रोलियम संबंधित लेन-देन पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। कोई भी देश ईरान से तेल नहीं खरीद सकता है। ऐसा करने पर वह सीधा अमेरिका से दुश्मनी मोल लेगा। इसके अलावा, और भी कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध हैं।
हाल ही में अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने के लिए भारत की छह कंपनियों सहित 20 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था।
अमेरिका का कहना है कि ईरानी सरकार तेल के पैसों से मिडिल ईस्ट में संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए आतंकवादियों को फंडिंग करती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पाकिस्तान के साथ अब ट्रंप कैसा व्यवहार करते हैं।