लश्कर-ए-तैयबा महिलाओं के लिए दो नए ट्रेनिंग सेंटर खोलने की तैयारी में है, जहां उन्हें ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, संगठन जल्द ही महिलाओं के लिए दो नए ट्रेनिंग कैंप खोलने की तैयारी में है। इन कैंपों को “मरकज़” के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां महिलाओं को ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के तौर पर काम करने की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इस जानकारी के सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा अपने महिला विंग को अब केवल राजनीतिक और प्रचार गतिविधियों तक सीमित नहीं रखना चाहता। प्रस्तावित दोनों मरकज़ में महिलाओं को संगठन से जुड़ी विभिन्न भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। अब तक संगठन का महिला विंग मुख्य रूप से भीड़ जुटाने, प्रचार-प्रसार और वैचारिक समर्थन तक सीमित था। हालांकि, महिला विंग की प्रमुख इफ़्फत सईद की हालिया टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि संगठन अपनी रणनीति में बदलाव कर सकता है।
बताया जा रहा है कि संगठन के वरिष्ठ नेता अब्दुर रऊफ़ ने इस्लामाबाद स्थित मरकज़ कुबा अल इस्लाम का हाल ही में दौरा किया। इस केंद्र का विस्तार किया जा रहा है, जिसमें महिलाओं के लिए अलग से प्रशिक्षण सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। इस विस्तार को संगठन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए महिला कैडर को संरचित और संगठित प्रशिक्षण दिया जा सके।
लश्कर-ए-तैयबा के अलावा जैश-ए-मोहम्मद ने भी हाल के समय में अपना महिला विंग सक्रिय किया है। बताया जाता है कि इस विंग की कमान संगठन प्रमुख मसूद अजहर की बहन के पास है। “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद से हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे शीर्ष आतंकी नेताओं के अंडरग्राउंड होने से दोनों संगठनों की गतिविधियों पर असर पड़ा है। माना जा रहा है कि संगठनात्मक ढांचे को बनाए रखने और गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए महिला विंग को सक्रिय किया जा रहा है।
इन घटनाक्रमों के बीच भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया तंत्र पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। महिला विंग के जरिए आतंकी संगठनों की रणनीति में संभावित बदलाव को गंभीरता से लिया जा रहा है।