
पाकिस्तान (Pakistan) में लोग एलपीजी (LPG) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से परेशान हैं। ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US War) के बाद से यह संकट बढ़ना शुरू हुआ था, जो अब काफी गंभीर हो गया है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान तो देश में स्थिति काफी गंभीर हो गई है। एलपीजी गैस की कीमत इतनी बढ़ गई है कि कई लोगों के लिए तो इसे खरीदना बेहद मुश्किल हो गया है।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कई हिस्सों में एलपीजी के दाम 750 पाकिस्तानी रूपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। एक गैस सिलेंडर की कीमत 10,000 पाकिस्तानी रूपए तक पहुंच गई है, जिससे लोगों के हाल बेहाल हो गए हैं।
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार एलपीजी की कीमतों में इस उछाल ने बेलगाम मुनाफाखोरी और किफायती ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने में सरकार की नाकामी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की वजह से ताफ्तान बॉर्डर के बंद होने से पाकिस्तान में परेशानी बढ़ गई है। ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान अपनी एलपीजी ज़रूरतों का लगभग 70% हिस्सा आयात से पूरा करता है, जबकि बाकी 30% हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा करता है। पाकिस्तान और ईरान पड़ोसी देश हैं और ऐसे में एलपीजी आयात के लिए पाकिस्तान मुख्य रूप से ईरान पर ही निर्भर है।
पाकिस्तान में ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा मौजूदा महीने के लिए एलपीजी की आधिकारिक कीमत 279.34 पाकिस्तानी रूपए प्रति किलोग्राम तय किए जाने के बावजूद कई जगह में उपभोक्ता लोगों को 550 से 600 पाकिस्तानी रूपए तक का भुगतान करना पड़ रहा है। पेशावर में कीमतें लगभग 600 पाकिस्तानी रूपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं, जबकि खैबर पख्तूनख्वा के कई उत्तरी इलाकों में तो दाम 750 पाकिस्तानी रूपए प्रति किलोग्राम तक देखे गए हैं। इसके पीछे कालाबाजारी बड़ी वजह है।
सरकारी एजेंसी ने अभी तक उन कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू नहीं की है, जो लोगों से ज़रूरत से ज़्यादा कीमत वसूल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकारी अधिकारियों को डर है कि इन सख्त कदमों से हड़ताल हो सकती हैं जिससे वितरण व्यवस्था बाधित हो सकती है और देश में ऊर्जा की कमी और भी गंभीर हो सकती है। इससे देश में कई जगह गैस की कीमतें और ज़्यादा बढ़ सकती हैं।