Pakistan China Relations: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने चीनी राजदूत से मुलाकात में दक्षिण एशिया के हालात पर चर्चा की और चीन के समर्थन के लिए आभार जताया।
Pakistan-China Relations: चीन के राजदूत जियांग झे डोंग (Jiang Zhe Dong) ने इस्लामाबाद स्थित प्रधानमंत्री आवास में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ (Shehbaz Sharif) से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने दक्षिण एशिया के मौजूदा हालात में पाकिस्तान के प्रति मजबूत समर्थन और सहयोग के लिए चीन ( China) का आभार (Pakistan-China Relations) जताया। शरीफ ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली क्यांग के लिए शुभकामनाएं प्रकट कीं और भारत ( India) की हालिया कार्रवाइयों को लेकर पाकिस्तान ( Pakistan) के पक्ष को समझने के लिए चीन का धन्यवाद किया।
डॉन डिजिटल के अनुसार उन्होंने पहलगाम में हुए हमले की निष्पक्ष और अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए चीन के समर्थन को सराहा। साथ ही बताया कि पाकिस्तान ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और इसमें 90,000 से अधिक नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जानें गंवाई हैं। साथ ही पाकिस्तान को 152 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान भी हुआ है।
शरीफ ने यह भी कहा कि भारत की ओर से पानी को 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल करना निंदनीय है और सिंधु जल संधि के तहत किसी भी पक्ष को समझौते से एकतरफा हटने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर विवाद का शांतिपूर्ण हल ही दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है। चीनी राजदूत ने पाकिस्तान के दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए भरोसा दिलाया कि चीन हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा, खास कर दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के साझा उद्देश्य को लेकर वह उसका साथ निभाएगा।
चीन ने पाकिस्तान की स्थिति को पूरी तरह से समझते हुए, विशेष रूप से कश्मीर और जल विवाद पर, मजबूत समर्थन की घोषणा की। चीनी राजदूत जियांग ज़ेढोंग ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ पूरी तरह से खड़े रहने का आश्वासन दिया।
प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को फिर से याद करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने इस लड़ाई में भारी नुकसान उठाया है और कई वर्षो से इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ उठा रहा है।
भारत की ओर से हाल ही में कश्मीर और जल संसाधन पर उठाए गए कदमों के बाद, दक्षिण एशिया में स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है। पाकिस्तान ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया है।
विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान और चीन का सहयोग इस समय बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा और स्थिरता की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।