Pakistan Financial Crisis: पाकिस्तान ने UAE से लिए गए 3.5 अरब डॉलर के लोन को लौटाने का फैसला किया है। UAE ने कड़ा रुख अपनाया है, जिससे पाकिस्तान के विदेशी रिजर्व पर भारी दबाव बढ़ गया है।
Pakistan UAE Loan: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही गंभीर संकट का सामना कर रही है, लेकिन इस समय में भी उसकी राजनीतिक अकड़ कम होने का नाम नहीं ले रही। वही संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जिसने पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को मुश्किल समय में संभाला और 3.5 बिलियन डॉलर का बड़ा कर्ज दिया, अब इस्लामाबाद की बेरुखी और आलोचना का सामना कर रहा है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घोषणा की कि वह UAE से लिए गए 3.5 बिलियन डॉलर के मैच्योर्ड लोन डिपॉजिट वापस करेगा। ये वही राशि थी जो द्विपक्षीय वाणिज्यिक समझौतों के तहत पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता के लिए UAE ने अपने पास रखी थी।
पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर जमील अहमद को उम्मीद थी कि UAE इस कर्ज की अवधि बढ़ा देगा, लेकिन UAE ने कड़ा रुख अपनाया। इस फैसले ने पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव डाल दिया है। 27 मार्च तक पाकिस्तान के पास कुल 16.4 बिलियन डॉलर का विदेशी रिजर्व था। UAE को कर्ज लौटाने और अप्रैल में 1.3 बिलियन डॉलर के बॉन्ड पेमेंट के बाद पाकिस्तान का कोषागार खाली होने के कगार पर पहुंच जाएगा।
पूर्व पाकिस्तानी मंत्री मुशाहिद हुसैन ने UAE की मदद करने के निर्णय पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने पैसे लौटाने का सही फैसला लिया। उन्होंने UAE के लिए बार-बार बेचारा शब्द का इस्तेमाल किया और तंज कसते हुए कहा कि UAE डोनाल्ड ट्रंप को भारी निवेश दे चुका है और यमन व सूडान जैसे युद्धों में फंसा हुआ है, इसलिए उसे पैसों की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि UAE को कर्ज लौटाने के बाद पाकिस्तान में बड़ा वित्तीय अंतर पैदा होगा, जिसे शहबाज सरकार के लिए संभालना लगभग असंभव होगा। इस संकट की पृष्ठभूमि में मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने पहले ही पाकिस्तान में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। ऊपर से IMF की शर्तों के तहत हाल ही में ईंधन सब्सिडी खत्म कर दी गई, जिससे महंगाई आसमान छू रही है।