पीएफआई पर देश भर में छापे मारी के बाद अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) के दफ्तरों और नेताओं के यहां देशभर में हुई छापेमारी में काफ़ी आपत्तिजनक चीज़ें मिली हैं। पीएफआई के अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से तार जु़ड़ने के सबूत मिले हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) के दफ्तरों और नेताओं के यहां देशभर में हुई छापेमारी में काफ़ी आपत्तिजनक चीज़े मिली है। जांच एजेंसी का दावा है कि इसमें काफ़ी चीज़े एक समुदाय विशेष के बड़े नेताओं को निशाना बनाने के जुटाई गई थीं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एनआईए की विशेष अदालत में सौंपी गई रिमांड रिपोर्ट में इस मामले से जुड़े 10 लोगों की कस्टडी मांगी गई है।
जांच एजेंसी की ओर से दर्ज किए गए केस के मुताबिक कट्टर इस्लामी संगठन ने युवाओं को चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) में शामिल होने के लिए उकसाया।
ऑपरेशन आक्टोपस दिया गया था नाम
PFI का भंडाफोड़ करने वाली NIA की कार्रवाई को 'आपरेशन आक्टोपस' नाम दिया गया। इसके तह 22 सितंबर को NIA ने 11 राज्यों में PFI के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान 106 PFI सदस्यों को गिरफ्तार किया गया । यह छापेमारी NIA, ED व राज्य पुलिस की संयुक्त कार्रवाई थी, जिसमें कुल 300 अधिकारी शामिल थे। इन्हें छापेमारी के दौरान शांत रहने को कहा गया था। इस आपरेशन में PFI के 100 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया था और करीब 200 को हिरासत में लिया गया था। ED व NIA के अनुसार PFI के सदस्य देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। NIA द्वारा दर्ज किए गए पांच मामलों के बाद यह कार्रवाई की गई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ये सभी टेरर फंडिंग, युवाओं के लिए ट्रेनिंग कैंप और लोगों के बीच कट्टरता फैलाने का काम हो रहा हैं। जांच एजेंसी ने कहा कि कालेज प्रोफेसर का हाथ काटने जैसा आपराधिक हिंसक कार्रवाईयों को PFI द्वारा अंजाम दिया जाता रहा है।
''भारत में इस्लामी शासन लागू करने की साजिश''
22 सितंबर को सौंपी गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संगठन ने हिंसक जिहाद और चरमपंथी गतिविधियों के जरिए भारत में इस्लामी शासन लागू करने की साजिश थी और 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने का एजेंडा बनाया गया था। रिपोर्ट में कहा गया, "पीएफ़आई ने समाज के एक तबके को सरकार की नीतियों को ग़लत ढंग से समझाया और उन्हें भारत के ख़िलाफ़ उकसाने की कोशिश की। जिससे देश और सरकार के प्रति उनमें नफरत बढ़े।"
केरल से सबसे अधिक गिरफ्तारी, राजस्थान से भी दो लोगों को किया गया है गिरफ्तार
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, "जांच के दौरान जो सामग्री मिली है, उससे पता चला है कि जिन लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है, वो लगातार संगठित अपराध और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल थे और समाज के दूसरे धार्मिक वर्गों को आतंकित करने का काम करते थे।"
एनआईए कोर्ट ने अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। छापेमारी के दौरान एनआईए ने केरल से 22, महाराष्ट्र और कर्नाटक से 20-20, तमिलनाडु से 10, असम से 9, उत्तर प्रदेश से आठ, आंध्र प्रदेश से पांच, मध्य प्रदेश से चार, पुडुचेरी और दिल्ली से तीन-तीन और राजस्थान से दो लोगों को गिरफ़्तार किया था।
इस्लामिक देशों से हो रही थी फंडिंग
उत्तर प्रदेश में बाराबंकी के कुर्सी थाना क्षेत्र के गौराहार गांव में बीते गुरुवार को एसटीएफ द्वारा पकड़े गए पापुलर फ्रंट आफ इंडिया के सदस्य नदीम और बहराइच के कमरुद्दीन उर्फ बबलू ने बड़ा खुलासा किया है। गिरफ्त में आए दोनों आरोपियों ने इस्लामिक देशों के माध्यम से पीएफआई को हो रही फंडिंग की बात स्वीकारने के साथ ही बताया कि संगठन की योजना मजहब के नाम पर हिंसा व नफरत फैलानी की थी। इतना ही नहीं संगठन से जुड़े सदस्य 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की गुपचुप योजना अमल में लाने के लिए भी लोगों को भड़काने का कार्य कर रहे हैं।
एसटीएफ ने गुरुवार देर रात कुर्सी थाने में नदीम व कमरुद्दीन के साथ ही वसीम को भी नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई पूरी की। तीनों ही आरोपियों पर देशद्रोह, धार्मिक भावनाएं भड़काने, साजिश रचने की धाराओं में केस किया गया है। एसटीएफ के निरीक्षक शिवनेत्र सिंह द्वारा कुर्सी थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे में कहा गया है कि एसटीएफ को लगातार सूचना मिल रही थी कि पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया व कुछ अन्य संगठनों से जुड़े लोग देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं।