
Iran US Tensions: मध्य पूर्व में तनाव अब हवाई अड्डों से लेकर समुद्री व्यापार के अहम रास्तों तक फैलता नजर आ रहा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बार फिर हमले में एक व्यक्ति की मौत और 11 लोगों के घायल होने की खबर है। इसी बीच ईरान ने अमेरिका के साथ समझौते की संभावनाओं पर असंतोष जताया है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर से जुड़ी नई घटना ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सऊदी अरब के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए ताजा हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि 11 अन्य घायल हो गए। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब इससे एक दिन पहले इसी हवाई अड्डे के पास मिसाइल हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत होने की खबर सामने आई थी। लगातार हुई इन घटनाओं ने सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यमन की राजधानी सना से भी तनाव बढ़ने की खबर आई। हूती समर्थक मीडिया के अनुसार, विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शहर में हवाई हमले से इमारतों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन घटनाओं के बीच अलग-अलग हमलों की जिम्मेदारी और उनके पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर सावधानी जरूरी है।
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने कहा है कि अमेरिका ने समझौते के लिए तेहरान की सात शर्तों में से कुछ को स्वीकार किया है, लेकिन उसका जवाब पर्याप्त नहीं है। इस बयान से संकेत मिलता है कि बातचीत की गुंजाइश पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, मगर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं।
इस घटनाक्रम के समानांतर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चर्चा हुई। अराघची ने सऊदी अरब और यमन के हूती समूह के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में मदद देने की पेशकश भी की। यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब सैन्य घटनाओं के साथ कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं।
समुद्री मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक बताई गई है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में तीसरे तेल सुपरटैंकर के होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकराने की घटना हुई। सामने आए वीडियो में जहाज आग की लपटों से घिरा दिखाई देता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर कच्चे तेल की आपूर्ति, परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि समुद्री यातायात कितने समय तक बाधित रहता है और घटनाओं की आधिकारिक जांच में क्या सामने आता है।
रियाद, सना और होर्मुज से आई खबरें दिखाती हैं कि मौजूदा संकट केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है। इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते, सऊदी अरब की मध्यस्थता संबंधी पहल और समुद्री मार्गों की सुरक्षा आने वाले दिनों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।