
Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव को और भड़काने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। रविवार को रूस ने पोलैंड सीमा से महज दो किलोमीटर दूर एक यात्री ट्रेन के लोकोमोटिव को ड्रोन से निशाना बनाया। यह ट्रेन कीव से वारसा की ओर जा रही थी। गनीमत रही कि चालक दल को समय पर चेतावनी मिल गई, जिससे सभी 206 यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई।
हमले से कुछ ही मिनट पहले उसी स्टेशन से एक कूटनीतिक ट्रेन गुजरी थी, जिसमें पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री कार्ल बिल्ट और कई यूरोपीय सुरक्षा अधिकारी सवार थे। यूक्रेनी रेलवे का कहना है कि सुरक्षा कारणों से उस ट्रेन का समय पहले कर दिया गया था, इसलिए आशंका है कि रूसी ड्रोन का असली निशाना वही वीआईपी ट्रेन रही होगी।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने इस हमले को यूरोपीय संघ और नाटो के दरवाजे पर सीधी दस्तक करार दिया। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी कहा कि लोकोमोटिव को जानबूझकर निशाना बनाया गया था, जो हमले की गंभीरता को दिखाता है।
घटना के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने तुरंत आपात बैठक बुलाई और चेतावनी दी कि आने वाले हफ्तों में रूस युद्ध को और तेज कर सकता है। विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने सहयोगी देशों से यूक्रेन को दिया जा रहा समर्थन दोगुना करने की अपील की।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति जेलेंस्की से अपील की कि वे रूस की डीजल रिफाइनरियों और ईंधन ढांचे पर हमले रोकें। ट्रंप के मुताबिक यूक्रेन के हमलों से रूस का ईंधन उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर वैश्विक डीजल कीमतों पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन के पास रूस के भीतर निशाना बनाने के लिए कई और विकल्प मौजूद हैं, इसलिए ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की जरूरत नहीं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि रूस और यूक्रेन दोनों ऊर्जा ढांचे को न छूने पर सहमत हो गए हैं, हालांकि इस समझौते की शर्तें और इसके लागू होने का समय अभी साफ नहीं है।