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अभी काम पूरा नहीं हुआ! नेतन्याहू की दो टूक-हिज्बुल्लाह को फिर मिलेगी करारी शिकस्त

इजराइल के PM नेतन्याहू ने हिज्बुल्लाह पर बड़ी जीत का दावा किया और लेबनान में आतंकी ढांचा नष्ट करने तक अभियान जारी रखने का वादा किया। जानें रोम वार्ता, सीमा विवाद को लेकर अपडेट
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Middle East tension

नेतन्याहू का लेबनान में आतंकी ढांचा मिटाने का ऐलान, photo (IANS)

Israel Lebanon Conflict: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कड़े शब्दों में कहा कि इजराइल ने हिज्बुल्लाह पर एक और बड़ी जीत हासिल कर ली है, और लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र में मौजूद आतंकवादी बुनियादी ढांचे का नामोनिशान मिटाने का इजराइल का अभियान आगे भी जारी रहेगा।

इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि सेना ने ब्यूफोर्ट रिज और अली अल-ताहेर रिज पर हिज्बुल्लाह के प्रमुख आतंकी गढ़ को नष्ट कर दिया है। बयान में कहा गया कि इजराइल की नीति एकदम स्पष्ट है- देश को किसी भी खतरे से पूरी तरह मुक्त किया जाएगा।

दुश्मनों को सीधी चेतावनी, "और भारी मार पड़ेगी"

नेतन्याहू ने आगे कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि अगर दुश्मनों ने अब तक सबक नहीं सीखा और दोबारा हमला करने की कोशिश की, तो उन्हें पहले से भी ज्यादा भारी कीमत चुकानी होगी। बयान में कहा गया कि "काम अभी अधूरा है" और ईश्वर की मदद से इसे पूरा किया जाएगा। नेतन्याहू ने कहा कि हम इजराइल राज्य के लिए किसी भी खतरे को खत्म करना जारी रखेंगे।

इस बयान से ठीक एक महीने पहले, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने बताया था कि रोम में इजराइल-लेबनान के बीच हुई बातचीत में सीमा विवाद और कैदियों की वापसी को लेकर सकारात्मक प्रगति हुई है। 7 अगस्त की कैबिनेट बैठक में आउन ने बताया कि बातचीत में चार अहम मुद्दे शामिल थे- युद्धविराम, घरों को गिराया जाना, सीमा रेखा और कैदियों की अदला-बदली।

आउन के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन युद्धविराम और बाकी बचे मुद्दों को सुलझाने में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि अमेरिकी जनरल जोसेफ क्लियरफील्ड जल्द ही बेरूत पहुंचकर इन मसलों पर आगे की कार्रवाई करेंगे।

हिज्बुल्लाह के विरोध के बावजूद जारी है सातवां दौर

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये टिप्पणियां रोम में तीन दिन चली बातचीत खत्म होने के अगले दिन आईं। शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार यह दोनों सरकारों के बीच बातचीत का सातवां दौर था, जिसका हिज्बुल्लाह लगातार विरोध करता रहा है। इस बातचीत का मकसद सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और जून अंत में वाशिंगटन में हुए फ्रेमवर्क समझौते को अमल में लाना है।