सिर्फ भारत ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी रेमिटेंस में जबरदस्त उछाल आया है। IFAD के मुताबिक दुनिया भर में रेमिटेंस पिछले साल 728.6 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो 2016 के मुकाबले लगभग दोगुनी है। रिपोर्ट के अनुसार यह रकम परिवारों को जरूरी खर्च पूरे करने, संकट के समय टिके रहने और आर्थिक मजबूती बनाने में बड़ी मदद करती है।