
Russia Attack On Ukraine: रूस के मिसाइल हमले में भारतीय कारोबारी लक्ष्मी मित्तल की कंपनी आर्सेलरमित्तल के यूक्रेन स्थित स्टील प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा है। हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 कर्मचारी घायल बताए गए हैं। हमले के बाद प्लांट में उत्पादन आंशिक रूप से रोकना पड़ा है।
दरअसल, यह हमला यूक्रेन के प्रमुख औद्योगिक शहर क्रिवी रिह में स्थित आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह स्टील प्लांट पर हुआ। यह शहर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का होमटाउन भी है।
कंपनी के मुताबिक, रूसी हमले में बिजली उत्पादन और ब्लास्ट फर्नेस से जुड़ी महत्वपूर्ण उत्पादन सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके चलते संयंत्र की उत्पादन प्रक्रिया आंशिक रूप से बाधित हुई है।
आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह ने बयान में कहा कि हमले से पावर जनरेशन और ब्लास्ट फर्नेस सेक्टर की प्रमुख सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। कंपनी ने कहा कि स्थिति का आकलन किया जा रहा है और उत्पादन बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
बता दें कि यह हमला रूस और यूक्रेन के बीच लंबी दूरी के हमलों में आई तेजी के बीच हुआ है। हाल के दिनों में दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं और ऊर्जा, औद्योगिक तथा सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में रूस ने यूक्रेनी शहरों पर 1,550 से अधिक हमलावर ड्रोन, करीब 1,560 गाइडेड एरियल बम और 62 मिसाइलें दागीं है।
वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि क्रिवी रिह का यह मेटलर्जिकल प्लांट भी उसके हमले के लक्ष्यों में शामिल था। रूस ने कीव में सैन्य-औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाने की बात कही है। रूसी पक्ष के अनुसार, हमलों की इस लहर के दौरान यूक्रेन के 822 ड्रोन को भी रोका गया।
बता दें कि आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह यूक्रेन के सबसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में शामिल है और वैश्विक स्टील कंपनी आर्सेलरमित्तल का हिस्सा है। फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद से क्रिवी रिह क्षेत्र लगातार रूसी हमलों की चपेट में रहा है।
स्टील प्लांट की उत्पादन प्रक्रिया बिजली और सहायक बुनियादी ढांचे पर काफी निर्भर है। ऐसे में पावर जनरेशन और ब्लास्ट फर्नेस सुविधाओं को हुआ नुकसान उत्पादन पर गंभीर असर डाल सकता है।
इसी बीच, यूक्रेन ने भी रूस के भीतर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते हवाई हमलों से ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।