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अगर ट्रंप नहीं माने तो क्या है होर्मुज स्टेट खुलवाने का प्लान बी, भारत समेत 60 देशों ने चर्चा शुरू की

जंग के हालातों के बीच होर्मुज स्टेट (Strait of Hormuz) खोलने के लिए भारत समेत 60 से ज्यादा देशों ने एक प्लान बी रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है। इस दौरान भारत ने कूटनीतिक समाधान और सुरक्षित समुद्री मार्ग की वकालत की है।

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Apr 03, 2026
होर्मुज स्टेट (फोटो- एएनआई)

दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्टेट (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालता है और इसके बंद होने से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। इसी बीच 60 से अधिक देशों ने आपात बैठक कर इसे दोबारा खोलने के लिए प्लान बी रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है। इस चर्चा के दौरान भारत ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई है।

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एक दिन में सिर्फ 3-4 जहाज ही गुजर रहे है

होर्मुज स्टेट के जरिए दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई गुजरती है। मिडिव ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण ईरान ने इस मार्ग को बंद कर दिया है। इसका सीधा असर जहाजों की आवाजाही पर पड़ा है और यह 100 से घटकर सिर्फ 3-4 प्रतिदिन रह गई है। वहीं करीब 2000 से ज्यादा जहाज इस मार्ग को पार करने के लिए समुद्र में फंसे हुए है। एशियाई देशों पर इसका सीधा असर पड़ा है क्योंकि वह मिडिल ईस्ट से ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। कई देशों को बिजली खपत सीमित करने और काम के घंटे घटाने जैसे कदम उठाने पड़े हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।

भारत ने संतुलन बनाए रखने की अपील की

भारत ने इस संकट में संतुलित और सक्रिय भूमिका निभाई है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक में भाग लेते हुए अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध आवाजाही की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संकट का उसकी ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। खास बात यह है कि ईरान ने भारत को मित्र देश की सूची में रखा है, जिससे कुछ भारतीय जहाजों को सीमित राहत मिली है। इसी के चलते अब तक छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से पार हो चुके हैं, जबकि अन्य जहाजों की निगरानी जारी है। भारत लगातार कूटनीतिक संवाद के जरिए समाधान खोजने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका बैठक में शामिल नहीं हुआ

ब्रिटेन के नेतृत्व में हुई इस बैठक में यवेटे कूपर ने कूटनीतिक और आर्थिक विकल्पों पर जोर दिया। खास बात यह रही कि डोनाल्ड ट्रंप के संभावित रुख को लेकर अनिश्चितता के कारण अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ। देशों ने सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत, प्रतिबंध और अमेरिका की भूमिका पर विचार किया। साथ ही, अगली बैठक में नौसेना की तैनाती और समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने के विकल्पों पर चर्चा होगी। हालांकि ईरान की सहमति के बिना सैन्य कदम उठाने को लेकर अधिकांश देशों में हिचकिचाहट बनी हुई है।

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