Iran-Israel Conflict: ईरान-इजरायल युद्ध से दुनिया भर में गतिरोध छाया हुआ है। दुनिया दो गुटों में बंट रही है एक खेमा इजरायल का समर्थन कर रहा है तो दूसरा ईरान का। पश्चिमी देशों ने इजरायल का समर्थन करने की रजामंदी दी है तो ईरान के साथ अरब देश और चीन-रूस खड़े होते दिखाई दे रहे हैं।
Iran-Israel Conflict: ईरान और इजरायल के बीच कभी भी युद्ध छिड़ सकता है. इजरायल ने ईरान पर हमला करने की पूरी तैयारी कर ली है। वो कभी भी ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमला कर सकता है। अगर ये हमला होता है तो ईरान (Iran) शांत नहीं बैठेगा वो फिर से इजरायल पर हमला करेगा जिससे ये तनाव भीषण युद्ध का रूप अख्तियार कर लेगा। दूसरी तरफ अब ईरान-इजरायल तनाव को लेकर दुनिया भी दो गुटों में बंटती दिखाई दे रही है। इजरायल के साथ जहां पश्चिमी देश खड़े हैं, वहीं ईरान के साथ चीन (China) और रूस खड़े होते दिख रहे हैं।
अमरीका (USA) समेत पश्चिमी देश जहां ईरान के हमले की निंदा कर रहे हैं और इजरायल पर किए गए मिसाइल हमले को रोकने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने ईरान के हमले की निंदा करने से दूरी बनाई हुई है। साथ ही पुतिन ने कहा है कि सीरिया में ईरानी दूतावास (Israel Attack on Iran) पर हमले के बाद पलटवार करना ही इजरायल की (Iran-Israel Conflict) आक्रामकता का सही जवाब हो सकता है। वहीं, ईरानी हमले पर चीनी प्रतिक्रिया पर भी इजरायल (Israel) ने असंतोष जताया है। चीन में इजरायली मिशन के उप प्रमुख युवल वैक्स ने स्पष्ट कहा है कि हम चीन से हमले की कड़ी निंदा और इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार की स्पष्ट स्वीकृति की उम्मीद कर रहे थे।
दूसरी तरफ, इस तनाव के चलते मध्य पूर्व (Middle East) में शिया और सुन्नी के बीच संघर्ष का खतरा भी बढ़ रहा है। इसको इस तरह समझ सकते हैं। शिया बहुल ईरान के हमले को रोकने में सुन्नी बहुल सऊदी अरब, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात ने भी मदद की। अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने स्पष्ट कहा है कि 'अलायंस' ने एक युद्ध को टाल दिया। गौरतलब है ईरान प्रभाव वाले सभी क्षेत्र जैसे सीरिया, लेबनान, यमन आदि सभी शिया बहुल देश हैं।
अगर ये संघर्ष बढ़ता है, शिया-सुन्नी में संघर्ष अगर चरम पर आता है तो ये कहना गलत नहीं होगा कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध (World War III) को खुद ही आमंत्रित कर रही है। हालांकि अमरीका और पश्चिमी देश हर हाल में ईरान और इजरायल के टकराव को रोकने की कोशिश भी कर रहे हैं। ईरान पर प्रतिबंध और उसके तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाना इन्हीं कोशिशों की बानगी को दिखाता है।