30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस मुस्लिम देश में तेजी से घट रही युवाओं की आबादी, चीन जैसी हो गई हालत

Population Decline: तुर्की में जन्म दर गिर कर 1.51 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई है, जो देश के भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। राष्ट्रपति एर्दोगन की अपीलों के बावजूद आर्थिक तंगी के कारण लोग बच्चे पैदा करने से बच रहे हैं।

3 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

Jan 29, 2026

Recep Tayyip Erdogan

Recep Tayyip Erdogan (फोटो सोर्स- ANI)

Birth Rate: दुनिया के नक्शे पर एक मजबूत सैन्य और आर्थिक शक्ति के रूप में पहचाने जाने वाला देश तुर्की (Turkey) इस समय एक ऐसे संकट से जूझ रहा है जो सरहदों की लड़ाई से कहीं ज्यादा घातक है। तुर्की अब "डेमोग्राफिक टर्निंग पॉइंट" यानि जनसांख्यिकीय मोड़ पर खड़ा हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, तुर्की में जन्म दर (Birth Rate) में इतनी बड़ी गिरावट आई है कि यह अब चीन और कई यूरोपीय देशों की तरह "बुजुर्गों के देश" बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे में तुर्की सरकार कुछ और कड़े या बड़े बदलाव कर सकती है।

क्या है तुर्की का 'जनसांख्यिकीय मोड़'?

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन अक्सर तुर्की के नागरिकों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील करते रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। तुर्की सांख्यिकी संस्थान (TurkStat) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि देश की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) गिर कर 1.51 पर आ गई है।

यह दर कम से कम 2.1 होनी चाहिए

यह आंकड़ा इसलिए डरावना है,क्योंकि किसी भी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए यह दर कम से कम 2.1 होनी चाहिए। इसका मतलब है कि अब तुर्की की आबादी बढ़ने के बजाय भविष्य में घटने लगेगी। यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी चीन और जापान ने दशकों पहले महसूस की थी।

सरकार की योजनाएं क्यों हो रही हैं फेल ?

तुर्की सरकार ने जन्म दर बढ़ाने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहन, टैक्स में छूट और कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) जैसी योजनाएं पेश कीं। बावजूद इसके, नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।

आर्थिक तंगी और महंगाई

तुर्की पिछले कुछ वर्षों से भीषण महंगाई (Inflation) और मुद्रा (Lira) की गिरती वैल्यू से जूझ रहा है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक से ज्यादा बच्चा पालना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है।

जीवनशैली में बदलाव आया

तुर्की के युवाओं में अब देर से शादी करने या 'चाइल्ड-फ्री' रहने का चलन बढ़ा है। करियर की प्राथमिकता और शहरीकरण ने पारंपरिक बड़े परिवारों की जगह छोटे परिवारों को दे दी है।

शिक्षा और महिला सशक्तीकरण

महिलाओं में उच्च शिक्षा और करियर के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण शादी की औसत उम्र बढ़ गई है, जिससे प्रजनन क्षमता की अवधि कम हो गई है।

समाजशास्त्रियों और अर्थशास्त्रियों ने गंभीर चिंता जताई

इस खबर पर तुर्की के समाजशास्त्रियों और अर्थशास्त्रियों ने गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो अगले 20-30 सालों में तुर्की की लेबर मार्केट (श्रम बाजार) में युवाओं की कमी हो जाएगी।

राष्ट्रपति एर्दोगन का रुख

राष्ट्रपति एर्दोगन ने इसे तुर्की के अस्तित्व के लिए "अस्तित्वगत खतरा" (Existential Threat) बताया है। वहीं सोशल मीडिया पर तुर्की के युवाओं का कहना है कि "सिर्फ अपील करने से बच्चे पैदा नहीं होते, सरकार को पहले रहने की लागत (Cost of Living) कम करनी चाहिए।"

नए बेबी बोनस : आर्थिक सहायता दुगुनी

सरकार बच्चों के जन्म पर दी जाने वाली आर्थिक सहायता को दुगुनी कर सकती है।

महिलाओं के लिए डे केयर सुविधाएं

कामकाजी महिलाओं के लिए मुफ्त डे-केयर और वर्क-फ्रॉम-होम नीतियों को अनिवार्य किया जा सकता है।

प्रवासियों के लिए इमिग्रेशन पॉलिसी

क्या तुर्की अपनी घटती आबादी की भरपाई के लिए पड़ोसी देशों से आने वाले प्रवासियों के प्रति अपनी नीति लचीली बनाएगा? यह एक बड़ा सवाल है।

नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना

इस मुद्दे का एक दिलचस्प पक्ष "भू-राजनीति" (Geopolitics) से जुड़ा है। तुर्की खुद को एक क्षेत्रीय महाशक्ति मानता है, जिसके पास नाटो (NATO) की दूसरी सबसे बड़ी सेना है।

सैन्य ताकत पर असर

अगर युवा आबादी कम होती है, तो भविष्य में सेना के लिए जवानों की भर्ती में कमी आएगी।

पड़ोसी देशों से तुलना

तुर्की के पड़ोसी देश ईरान और मिस्र में भी जन्म दर में गिरावट देखी गई है, लेकिन तुर्की की रफ्तार अधिक तेज है। यह पूरे मध्य पूर्व (Middle East) के शक्ति संतुलन को बदल सकता है।

Story Loader