
US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा छद्म युद्ध अब सीधे तौर पर विश्व युद्ध की आहट में बदल चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे भयानक और सीधी सैन्य चेतावनी दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा है कि अगर ईरान ने उनकी हत्या करने या उन्हें नुकसान पहुंचाने की रत्ती भर भी कोशिश की, तो अमेरिकी सेना ईरान को पूरी तरह से 'नेस्तनाबूद' (Decimate) कर देगी।
Trump Iran War Threat: ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की 1,000 घातक मिसाइलें इस वक्त सीधे इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान' पर निशाना साधे हुए हैं और वे पूरी तरह 'लॉक एंड लोडेड' मोड में हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यह तो सिर्फ शुरुआत होगी, इसके बाद हजारों और मिसाइलें ईरान को श्मशान बनाने के लिए आसमान से बरसेंगी।
दरअसल, इस महा-तनाव के पीछे इजरायली खुफिया एजेंसी की वह रिपोर्ट है, जिसने वाशिंगटन से लेकर यरूशलेम तक हड़कंप मचा दिया है। खुफिया इनपुट के अनुसार, ईरान के कट्टरपंथियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के नए कमांडरों ने ट्रंप को निशाना बनाने के लिए एक बेहद 'विशिष्ट और नए प्लान' को हरी झंडी दिखाई है।
हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में भी ट्रंप को मार डालो के नारे गूंजे थे। इसी के बाद ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सोशल मीडिया पर सीधे तबाही का फरमान सुना दिया। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिकी सेना को निर्देश दिए जा चुके हैं और वे किसी भी वक्त ईरान के हर हिस्से को मलबे में तब्दील करने में सक्षम हैं।
तनाव सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र में भी बारूद सुलग रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले महीने (जून में) जो अंतरिम समझौता (MoU) हुआ था, वह अब पूरी तरह से टूटता नजर आ रहा है। वाशिंगटन लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है कि वह वैश्विक तेल व्यापार के सबसे अहम रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमले न करने का सार्वजनिक ऐलान करे।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने अमेरिका पर ही पलटवार किया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने नए प्रतिबंध लगाकर समझौते की शर्तों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबफ ने दो टूक कहा है कि तेहरान कभी भी अमेरिका के सामने घुटने नहीं टेकेगा और अगर वाशिंगटन ने अपनी सीमाएं लांघी, तो ईरान 'ईंट का जवाब पत्थर से' देने के लिए तैयार है।
इस बीच, अमेरिका का सबसे करीबी दोस्त इजरायल भी इस आग में घी डालने का काम कर रहा है। बीती देर रात इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान के नबातिह (Nabatieh) इलाके पर भीषण हवाई हमले किए। इसके ठीक 5 मिनट बाद उसी जगह पर इजरायली ड्रोन ने दोबारा बमबारी की। लितानी नदी के पास स्थित जवतार अल-शरकिया में इजरायली सेना की मशीनगनों से लगातार फायरिंग की आवाजें सुनी गईं। इजरायल का दावा है कि उसने लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में घुसकर ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के एक खूंखार लड़ाके समेत दो लोगों को ढेर कर दिया है।
इस भीषण तनाव को देखते हुए इस पूरे मामले में मध्यस्थ (Facilitator) की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के हाथ-पांव फूल गए हैं। शहबाज शरीफ ने आनन-फानन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन को फोन मिलाकर अपनी 'गहरी चिंता' जताई। शरीफ ने दोनों देशों से शांति की अपील करते हुए कहा कि पिछले महीने हुए MoU का सम्मान किया जाना बेहद जरूरी है, वरना पूरा क्षेत्र तबाह हो जाएगा।
वैश्विक कूटनीति के स्तर पर कतर के वार्ताकार भी इस वक्त मामले को शांत कराने के लिए तेहरान की सड़कों पर दौड़-भाग कर रहे हैं। वहीं, इस शनिवार को ओमान में भी एक गुप्त और बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने की संभावना है, जहां पर्दे के पीछे से इस युद्ध को टालने की आखिरी कोशिशें की जाएंगी। अब देखना यह है कि ओमान की धरती पर होने वाली यह कूटनीतिक बातचीत बारूद के इस ढेर को शांत कर पाती है या दुनिया एक और महाविनाशकारी युद्ध का गवाह बनती है।