
रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। ( फोटो: ANI/Patrika Graphics)
India May Face Us Sanctions Over Russian Oil: अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई जंग के बीच चार अमेरिकी सीनेटरों रिपब्लिकन लिंडसे ग्राहम, रोजर विकर,डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लुमेंथल और जीन शाहीन ने ने ट्रंप प्रशासन के साथ एक समझौते का ऐलान किया है, जिसके तहत उन देशों पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून आगे बढ़ाया जाएगा जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखे हुए हैं। इससे भारत पर 500 प्रतिशत नया टैरिफ लगने का खतरा मंडरा रहा है।
दरअसल अमेरिका के इन सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसका मकसद परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देना और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाना है। दोनों पार्टियों के नेताओं वाले इस समूह ने कहा कि प्रस्तावित कानून का मकसद उन देशों पर दबाव डालना है जो रूसी तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं, ताकि वे अपनी इस निर्भरता को कम कर सकें।
यूएस के इन सीनेटरों ने कहा, हमें यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े अपने संशोधित बिल को आगे बढ़ाने के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ एक समझौता किया है। हम इस अहम प्रगति से बहुत खुश हैं और उम्मीद करते हैं कि यह बिल जल्द ही कानून बन जाएगा।
इस बिल के पिछले वर्सन की बात करें तो रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून में उन देशों से आयातित सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव शामिल था, जो रूस के साथ व्यापार जारी रखते हैं। हालांकि, बिल के नए मंजूरशुदा वर्सन में बदलाव किए जा रहे हैं, लेकिन बदले हुए टैरिफ और इसे लागू करने के तरीके अभी पूरी तरह से तय नहीं हुए हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से जारी अस्थायी लाइसेंस की समय-सीमा खत्म होने के बाद कई देशों पर राजनयिक दबाव बढ़ गया है। इस लाइसेंस के तहत, कमजोर देशों को पहले अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना किए बिना समुद्री रास्तों से रूस से तेल खरीदने की अनुमति थी, लेकिन अब उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
कानून बनाने की यह नई पहल ट्रंप प्रशासन की ओर से दूसरे देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने और टैरिफ बड़े पैमाने पर लागू करने करने की मंशा के अनुरूप है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों को सीधे तौर पर मॉस्को के साथ भारत के जारी ऊर्जा संबंधों से जोड़ा है और चेतावनी दी है कि ऊर्जा की और खरीद से और भी कठोर दंडात्मक व्यापारिक कार्रवाई हो सकती है।
ये चार सीनेटर 'रूस प्रतिबंध अधिनियम 2025' के सबसे बड़े समर्थकों में से हैं। इस प्रस्तावित कानून का मकसद उन देशों से आने वाले सामान और सेवाओं पर अमेरिकी टैरिफ लगाना है, जो रूस से तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम और पेट्रोलियम प्रोडक्ट खरीदते हैं।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस बिल के शुरुआती प्रारूप में रूसी एनर्जी खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत का अमेरिकी टैरिफ लगाने का प्रावधान था। सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने पहले इस प्रस्तावित टैरिफ को "बहुत भारी बोझ डालने वाला" बताया था। हालांकि, यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी देता है कि अगर उन्हें लगे कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है, तो वे किसी खास देश को 180 दिनों की छूट दे सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिल में संशोधन किया गया है और फीस से जुड़े नियमों में ढील दी गई है। हालांकि, अपडेट किए गए कानून की अंतिम जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
बहरहाल अमेरिका में लाया गया नया बिल भारत के नजरिये से भी चर्चा का केंद्र बिंदु है, क्यों कि भारत रूस का मित्र है और अमेरिका भारत पर पहले से यह दबाव बनाता रहा है कि वह रूस से तेल न खरीदे। वहीं इस बिल के समर्थकों ने खास तौर पर भारत का जिक्र किया है। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने जून 2025 में X पर लिखा था, चीन और भारत से: अगर आप पुतिन की युद्ध मशीन का समर्थन करते रहे, तो इसके लिए आप खुद ही जिम्मेदार होंगे।
Updated on:
11 Jul 2026 01:34 pm
Published on:
11 Jul 2026 01:34 pm
