Love: वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में बताया कि इंसान का प्रेम हर किसी के लिए अलग-अलग कैसे होता है। इसमें इंसान की कोई गलती नहीं है, बल्कि ये खेल साइंस का है।
Love: प्यार एक खूबसूरत अहसास है, वो भले ही किसी भी रूप में हो। हाल ही वैज्ञानिकों ने प्यार के 6 रूपों की पहचान की है, जो दिमाग के अलग-अलग हिस्सों से पैदा होता है। इसे माता-पिता या प्रकृति से जोड़कर देखा गया है। सेरेब्रल कॉर्टेक्स पत्रिका में प्रकाशित नए अध्ययन से पता चलता है कि प्यार शब्द एक ही है, लेकिन अहसास के आधार पर ये दिमाग के अलग-अलग हिस्सों को सक्रिय करता है। इस रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने कुछ लोगों के दिमाग की गतिविधियों को मापा। इसके लिए उन्होंने MRI स्कैन का इस्तेमाल किया। इसमें प्रक्रिया में मां-बाप, सगे-संबंधी, प्रेमी, मित्र, अजनबी, पालतू जानवर और प्रकृति से प्यार के अहसास मापा गया।
रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि बच्चों के लिए प्यार सबसे तीव्र प्रतिक्रिया देता है। जब कोई बच्चे को पहली बार देखते हैं और वो कोमल और स्वस्थ है तो आपका मस्तिष्क आश्चर्यजनक प्रतिक्रिया देता है। इसके बाद प्रेमी से प्यार का अहसास आता है। अध्ययन में भावनात्मक प्यार और तटस्थ प्यार के बीच अंतर के समझाया गया है। अध्ययन की सह लेखिका पार्टिली रिने ने कहा, माता-पिता का प्यार मस्तिष्क की प्रतिक्रिया प्रणाली को गहराई से सक्रिय करता है। रिने ने कहा, ऐसी गहराई किसी अन्य प्यार में नजर नहीं आया।
अध्ययन में पाया गया कि अजनबियों के प्रति प्रेम, घनिष्ठ रिश्तों में प्रेम की तुलना में कम प्रतिक्रिया देने वाला था। इसमें मस्तिष्क की सक्रियता भी कम देखी गई। इसी तरह प्रकृति के प्रति प्रेम प्रतिक्रिया प्रणाली और दृश्य क्षेत्रों को तो सक्रिय करता है, लेकिन मस्तिष्क के सामाजिक क्षेत्र को नहीं। इन नतीजों से पता चलता है कि प्यार के भावों के ्रप्रति मस्तिष्क की गतिविधि न केवल निकटता से प्रभावित होती है, बल्कि इस बात से भी प्रभावित होती है कि वह वस्तु मानव है, कोई अन्य प्रजाति या प्रकृति।