
ईरान के साथ 14 सूत्रीय समझौते ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के साथ ही अमेरिका ने अपनी वायुसेना को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी वायुसेना लंबे समय से ऐसे एयरक्राफ्ट विकसित करने पर काम कर रही थी जो पायलट वाले फाइटर जेट्स के साथ मिलकर युद्ध में हिस्सा ले सकें। अब इस योजना को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी वायुसेना ने लगभग 1,000 सेमी-ऑटोनॉमस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तैनात करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन एयरक्राफ्ट्स को आधुनिक AI तकनीक और मिशन ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर से लैस किया जाएगा ताकि वे अत्यधिक खतरनाक युद्ध क्षेत्रों में भी तेजी से ऑपरेशन कर सकें।
अमेरिकी वायुसेना (USAF) ने जनरल एटॉमिक्स और एंडुरिल को पहले चरण के सहयोगी लड़ाकू विमान (CCA) प्रोग्राम के तहत उत्पादन कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। जनरल एटॉमिक्स FQ-42A और एंडुरिल FQ-44A एयरक्राफ्ट तैयार करेगी। वायुसेना अधिकारियों के अनुसार दोनों कंपनियों ने तय समय से चार महीने पहले मिशन आवश्यकताओं को पूरा कर लिया। अमेरिकी वायुसेना के चीफ जनरल केन विल्सबाख ने कहा कि यह तकनीक अमेरिका को अत्यधिक चुनौतीपूर्ण युद्ध क्षेत्रों में दुश्मनों की तुलना में ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में मानव और मशीन की साझेदारी निर्णायक साबित होगी।
अमेरिकी वायुसेना ने केवल एयरक्राफ्ट निर्माण ही नहीं बल्कि मिशन ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर के लिए भी छह बड़ी कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट दिया है। इनमें एंडुरिल, जनरल एटॉमिक्स, लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थरोप ग्रुम्मन, आरटीएक्स कॉलिन्स एयरोस्पेस और शील्ड एआई शामिल हैं। इनमें से एंडुरिल, आरटीएक्स कॉलिन्स एयरोस्पेस और शील्ड एआई को अतिरिक्त उत्पादन विकल्प भी दिए गए हैं ताकि सॉफ्टवेयर डिलीवरी की गति बढ़ाई जा सके। अमेरिकी एयर फोर्स सचिव ट्रॉय मिंक ने कहा कि मिशन ऑटोनॉमी ही CCA प्रोग्राम की सबसे महत्वपूर्ण ताकत है और मल्टी-वेंडर मॉडल से तेजी से नई तकनीक शामिल की जा सकेगी।