उत्तर कोरिया के किम के साथ सिंगापुर में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बैठक के बाद से पोम्पियो और सुरक्षा परिषद के बीच बैठक पहली थी। अमरीका ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र को बताया कि उत्तर कोरिया प्रतिबंधों के बावजूद अनुमन्य राशि से अधिक पेट्रोलियम उत्पादों को आयात करने पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है।
वाशिंगटन। अमरीका के राज्य सचिव माइक पोम्पिओ ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों के पूर्ण आवेदन की गारंटी देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से प्योंगप्यांग पर दबाव बनाये रखने के लिए कहा है। मीडिया को जारी किए गए एक बयान में माइक पोम्पिओ ने कहा कि इन प्रतिबंधों को तब तक जरी रखना चाहिए जब तक कि उत्तरी कोरियाई नेता किम जोंग-उन परमाणुकरण निरस्त्रीकरण की ओर बढ़ने का अपना वादा नहीं पूरा करते।
क्या कहा यूएस राज्य सचिव ने
यूएस राज्य सचिव माइक पोम्पिओ ने कहा है कि संयुक्त राज्य सरकार, उत्तर कोरिया के साथ परमाणु मामले की प्रगति की संभावनाओं के बारे में आशावादी बनी हुई है, लेकिन उसका मानना है कि जब प्रतिबंध पर्याप्त रूप से लागू नहीं होते हैं, ऐसे कदम की सफलता की संभावना कम हो जाती है। इसके साथ ही माइक पोम्पिओ ने अमरीकी मिशन की लिए समर्थन जुटाने के लिए जापानी राजदूत के साथ न्यूयॉर्क में शुक्रवार को मुलाकात की। अब वह दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री कांग युंग व्हा और सुरक्षा परिषद की देशों से मुलाकात कर अपने मिशन की लिए समर्थन जुटाएंगे।
अमरीका ने कहा- जरूरी हैं प्रतिबन्ध
उत्तर कोरिया के किम के साथ सिंगापुर में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बैठक के बाद से पोम्पियो और सुरक्षा परिषद के बीच बैठक पहली थी। पोम्पियो ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, उत्तरी कोरिया के पूरी तरह से सत्यापित परमाणु निरस्त्रीकरण की आवश्यकता पर एकजुट है, जैसा कि किम जोंग द्वारा सहमति व्यक्त की गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों को पूरी तरह से लागू करने के लिए सर्वसम्मति से सहमत हुए हैं।
चीन और रूस समर्थन में नहीं
अमरीका ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र को बताया कि उत्तर कोरिया प्रतिबंधों के बावजूद अनुमन्य राशि से अधिक पेट्रोलियम उत्पादों को आयात करने पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है। इसी कारण वाशिंगटन ने उन उत्पादों की बिक्री को प्योंगयांग को तुरंत बंद करने के लिए सुरक्षा परिषद से कहा है। हालांकि अमरीका की इस अपील को रूस और चीन द्वारा नकार दिया गया है लेकिन माना जा रहा है कि अमरीका सुरक्षा परिषद् की अन्य सदस्यों की मदद से अपनी बात मनवा सकता है।