
US Military Strikes on Iran: पश्चिम एशिया में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। इसी क्रम में वॉशिंगटन ने तेहरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात सैन्य कार्रवाई की। इस संबंध में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि इन हमलों का मकसद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की तरफ से व्यापारिक जहाजों के लिए पैदा होने वाले खतरों को कम करना है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा, 'अमेरिकी रक्षा बलों ने आज शाम 6:45 बजे (ET) ईरानी सैन्य ठिकानों पर एक और रात हमले किए। यह लगातार 13वीं रात है, जब ईरान को जवाबदेह ठहराने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से व्यापारिक जहाजों को होने वाले खतरों को कम करने के उद्देश्य से कार्रवाई की जा रही है।'
खास बात यह है कि अमेरिका की तरफ से ये ताजा हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ट्रुथ सोशल पर की गई पोस्ट के कुछ घंटों के बाद हुए हैं। दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि जहाजों, माल या उनसे संबंधित किसी भी संपत्ति को होने वाले नुकसान की भरपाई अमेरिका के नियंत्रण में मौजूद ईरानी धनराशि से की जाएगी। उन्होंने इसे निष्पक्ष और न्यायसंगत कदम बताया है।
ईरान पर हमलों के संबंध में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों और जॉर्डन की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया है। इस बयान से स्पष्ट होता है कि ये देश ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि आत्मरक्षा को अपना वैध अधिकार मानते हैं।
खाड़ी देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान पर बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें कहा गया है कि हस्ताक्षरकर्ता देशों को अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजरानी और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए सभी वैध और आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है।
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