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अमेरिका से तनाव के बीच रूस और चीन से खुश हुआ ईरान, VETO पावर को लेकर जमकर की तारीफ

UNSC Veto Power Latest Update: अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने रूस और चीन के UNSC वीटो की तारीफ की। ईरानी पार्लियामेंट के स्पीकर ने कहा कि कानून का राज एक बार फिर पक्का हुआ है।
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भारत

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Saurabh Mall

Sep 18, 2026

veto power russia-china

ईरान ने रूस और चीन की कर दी तारीफ। फोटो में ईरानी स्पीकर गालिबफ और यूएनएससी में VETO पावर का इस्तेमाल करते रूस और चीन के प्रतिनिधि (इमेज सोर्स- ANI और /@ Mossad Commentary एक्स स्क्रीनशॉट)

Mohammad Bagher Ghalibaf Iran Sanctions: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। क्योंकि संयुक्त राष्ट्र में एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिससे तेहरान को बड़ी राहत मिली। रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी कि UNSC में अमेरिका के एक ड्राफ्ट प्रस्ताव के खिलाफ वीटो कर दिया। इसके बाद ईरान ने दोनों देशों के रुख की खुलकर तारीफ की। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने इसे एकतरफा फैसलों के खिलाफ अहम कदम बताया।

रूस और चीन के वीटो की चर्चा तेज

ईरानी स्पीकर गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रूस और चीन के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एकतरफा व्यवस्था, जिसमें एक पक्ष दबाव के जरिए छूट हासिल करता है, अब खत्म हो गई है। दोनों देशों के वीटो ने UNSC के राजनीतिक इस्तेमाल को खारिज किया।

उन्होंने मल्टीलेटरलिज्म को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। गालिबफ ने कहा कि एकतरफा फैसला किसी के हित में नहीं होता। उनके बयान से साफ है कि तेहरान इस वोट को अपने लिए अहम कूटनीतिक समर्थन के तौर पर देख रहा है।

अब समझिए…आखिर क्या था अमेरिका का प्रस्ताव?

दरअसल, अमेरिका ने UNSC में एक ड्राफ्ट रेजोल्यूशन पेश किया था। इसमें ‘1737 ईरान सैंक्शन्स कमेटी’ से जुड़े एक्सपर्ट्स के पैनल का कार्यकाल एक साल और बढ़ाने की बात थी। यह अवधि सितंबर 2027 तक बढ़ाई जानी थी।

UNSC के मुताबिक, प्रस्ताव के समर्थन में 11 वोट मिले। वहीं रूस और चीन ने इसके खिलाफ वोट किया। बता दें इसमें दो देशों सोमालिया और पाकिस्तान ने वोट नहीं दिया। रूस और चीन दोनों UNSC के स्थायी सदस्य हैं। ऐसे में उनके नकारात्मक वोट के कारण प्रस्ताव पास नहीं हो सका।

रूस और चीन पहले भी ईरान पर प्रतिबंधों को लेकर वेस्टर्न देशों के रुख पर सवाल उठाते रहे हैं। अगस्त 2025 में फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने ईरान पर UN प्रतिबंध फिर से लागू करने के लिए स्नैपबैक मैकेनिज्म शुरू किया था। रूस और चीन ने इस कदम को कानूनी तौर पर गलत बताया था।

ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बढ़ा विवाद

वोटिंग के बाद अमेरिका और ब्रिटेन ने रूस और चीन के फैसले पर सवाल उठाए। अमेरिकी राजदूत जेनिफर लोसेटा ने कहा कि प्रस्ताव से ईरान और उसके सहयोगियों के बीच प्रतिबंधित रक्षा सहयोग की जानकारी सामने आ सकती थी।

वहीं ब्रिटिश राजदूत सारा मैकिंटोश ने भी रूस और चीन के फैसले की आलोचना की। वहीं रूसी राजदूत वसीली नेबेंज़्या ने कहा कि इस प्रक्रिया के लिए जरूरी कानूनी और प्रक्रियात्मक आधार मौजूद नहीं थे। चीनी राजदूत फू कांग ने बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।

इस पूरे विवाद का असर ईरान पर प्रतिबंधों की निगरानी पर भी पड़ा है। 1737 कमेटी से जुड़े एक्सपर्ट पैनल का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ सका। UNSC के अनुसार, अब ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की स्वतंत्र निगरानी में IAEA की भूमिका और अहम हो गई है।

10 सितंबर को IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी से ईरान के नियमों के पालन को लेकर UNSC को रिपोर्ट देने को कहा था। पश्चिमी देश ईरान पर 2015 के न्यूक्लियर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हैं। ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।