
Ship to Ship Transfer
Ship to Ship Transfer: खाड़ी क्षेत्र में तेल की आवाजाही अब सिर्फ पाइपलाइन और सामान्य समुद्री रास्तों तक सीमित नहीं रह गई है। सऊदी अरब ने लाल सागर के रास्ते पर बढ़ी मुश्किलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी संकट के बीच ओमान के सोहर को वैकल्पिक ट्रांसफर केंद्र के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया है। यहां समुद्र में एक टैंकर से दूसरे टैंकर में कच्चा तेल पहुंचाया जा रहा है। यह तरीका आपूर्ति जारी रखने में मदद कर रहा है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा, बीमा और पर्यावरण से जुड़े गंभीर जोखिम भी जुड़े हैं।
सऊदी अरब की तेल निर्यात व्यवस्था को हाल के हमलों से बड़ा झटका लगा। देश की करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बाधित हो गई, जो पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू बंदरगाह से जोड़ती है । इस रास्ते का महत्व इसलिए था क्योंकि इससे तेल को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे बिना बाहर भेजा जा सकता था।
ऐसे हालात में ओमान का सोहर पोर्ट महत्वपूर्ण हो गया है। सऊदी टैंकर कच्चा तेल लेकर यहां के आसपास पहुंचते हैं और समुद्र में दूसरे बड़े जहाजों को कार्गो सौंप दिया जाता है। इसके बाद दूसरा जहाज तेल को एशिया के बाजारों की ओर ले जाता है। सितंबर और अक्टूबर में सऊदी अरामको सोहर के पास इस व्यवस्था के जरिए करीब 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल भेजने की योजना बना रही है।
इसे समुद्री भाषा में Ship-to-Ship यानी STS Transfer कहा जाता है। दो जहाजों को बेहद सावधानी से एक-दूसरे के समानांतर लाया जाता है। जहाजों के बीच रबर फेंडर लगाए जाते हैं ताकि टक्कर से बचाव हो। इसके बाद विशेष पाइप और होज के जरिए एक जहाज से दूसरे में तेल पंप किया जाता है।
समुद्र की लहरें, हवा, जहाजों की गति और पाइपलाइन का दबाव लगातार नियंत्रित करना पड़ता है। जोखिम वाले अभियानों में जहाजों का AIS ट्रैकिंग सिस्टम बंद किया जाना भी रिपोर्टों में सामने आया है, जिससे उनकी वास्तविक आवाजाही को ट्रैक करना कठिन हो जाता है।
यह रणनीति केवल रियाद तक सीमित नहीं है। स्वतंत्र शिपिंग ट्रैकर्स और मीडिया रिपोर्टों में कुवैत और कतर के भी कुछ कार्गो के लिए इसी तरह के रास्तों का इस्तेमाल करने की जानकारी सामने आई है। सोहर के अलावा संयुक्त अरब अमीरात का फुजैराह भी होर्मुज के बाहर तेल भंडारण, बंकरिंग और समुद्री ट्रांसफर के लिहाज से महत्वपूर्ण केंद्र है।
STS ट्रांसफर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि जोखिम वाले जलमार्ग में बड़े अंतरराष्ट्रीय टैंकरों की निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सकती है। लेकिन इसकी कीमत भी है। पुराने जहाज, खराब रखरखाव, बिना पर्याप्त निरीक्षण के होज और सीमित बीमा सुरक्षा दुर्घटना की स्थिति में तेल रिसाव या टक्कर का खतरा बढ़ा सकते हैं।
TankerTrackers के अनुसार, पिछले 14 दिनों में ऐसे ट्रांसफर की मात्रा करीब 7.15 मिलियन बैरल प्रतिदिन रही, जो पिछले महीने की तुलना में 56 प्रतिशत अधिक बताई गई।
बीमा भी बड़ी चुनौती है। युद्ध जैसे माहौल में सामान्य बीमाकर्ता जहाज, कार्गो, प्रदूषण और टक्कर से जुड़े पूरे जोखिम को कवर करने से बच सकते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय तेल कंपनियां और सरकार समर्थित बीमा व्यवस्था का सहारा लेना पड़ सकता है।
भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े एशियाई खरीदारों के लिए यह घटनाक्रम खास महत्व रखता है। सऊदी तेल की आपूर्ति जितनी देर तक वैकल्पिक समुद्री नेटवर्क से चलती रहती है, वैश्विक बाजार में तत्काल कमी का दबाव उतना नियंत्रित रह सकता है। सोहर के जरिए बढ़ते सऊदी निर्यात की खबरों के बीच तेल कीमतों पर दबाव कुछ कम हुआ।
Updated on:
18 Sept 2026 02:16 pm
Published on:
18 Sept 2026 01:42 pm
