अमेरिका ने बांग्लादेश पर टैरिफ घटा दिया है। अमेरिका ने यह कदम ऐसे समय में उठाया जब दो दिन बाद बांग्लादेश में आम चुनाव होना है। पढ़ें पूरी खबर..
भारत और अमेरिका के बीच होने वाले ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी हो गया है। इसके बाद अमेरिका ने रेसिप्रॉकल टैरिफ को घटाकर कर 18 फीसदी कर दिया। इससे दक्षिण एशिया में भारत सबसे कम अमेरिकी टैरिफ झेलने वाला देश बन गया। इसका फायदा भारत के गार्मेंट्स फैक्ट्रियों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, पड़ोसी देश बांग्लादेश भी गार्मेंट्स सेक्टर में वैश्विक स्तर पर मजबूत असर रखता है। लिहाजा, जैसे ही भारत संग अमेरिका के ट्रेड डील होने की खबर सामने आई। ढाका के अधिकारियों ने भी वाशिंगटन से टैरिफ कम करने अपील की। अमेरिका ने टैरिफ ऐसे समय में घटाया है, जब दो दिन बाद वहां आम चुनाव होना है।
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने बांग्लादेश पर टैरिफ 20 फीसदी से घटाकर 19 फीसदी कर दिया है। साथ ही, कुछ ऐसे कपड़ों पर जवाबी टैरिफ शून्य कर दिया है। जिसका कच्चा माल बांग्लादेश अमेरिका से आयात करता है। माना जा रहा है कि दोनों देशों की ओर से जल्द ही औपचारिक अधिसूचना जारी किए जाने के बाद यह समझौता प्रभावी हो जाएगा। इस डील के पूरा होने पर ढाका में मौजूद अमेरिकी राजदूत जेमीसन ग्रीर ने कहा कि यह समझौता अमेरिकी व्यापार नीति में बांग्लादेश की स्थिति को मजबूत करेगा।
ढाका में मौजूद यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने ट्वीट किया कि अमेरिका-बांग्लादेश के बीच आपसी व्यापार समझौता अमेरिकी किसानों और उत्पादकों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है, जिससे सोयाबीन और मक्का से लेकर सिविल एयरक्राफ्ट और मोटर वाहनों तक अमेरिकी एक्सपोर्ट के लिए मार्केट एक्सेस बढ़ रहा है।
गारमेंट्स सेक्टर बांग्लदेश की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। बांग्लादेश से निर्यात होने वाली 80 फीसदी वस्तु इसी सेक्टर की है। इसमें 40 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। इनमें मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग शामिल हैं। बांग्लादेश की आर्थिक मामलों की समझ रखने वाले लोगों ने कहा कि कम टैरिफ रेट बांग्लादेशी निर्माताओं को अमेरिकी बाजार में टिके रहने का मौका देंगे। उन्होंने कहा कि साल 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रॉकल टैरिफ का ऐलान किया था। उस दौरान बांग्लादेश पर 37 फीसदी टैरिफ लगाया गया था। बाद में अगस्त में इसे घटाकर 20 प्रतिशत किया गया था। अब ताजा समझौते के बाद यह घटकर 19 फीसदी पर आ गया है।