
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान। ( फोटो: AI)
Tarique Rahman Interview: बांग्लादेश में चुनाव से पहले देश की राजनीति के लिए अब तक का सबसे बड़ा और आत्मविश्वास से भरा बयान सामने आया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान (Tarique Rahman) ने साफ तौर पर कह दिया है कि उन्हें सत्ता में आने के लिए अब किसी गठबंधन या बैसाखी की जरूरत नहीं है। उन्होंने एक विस्फोटक इंटरव्यू (Tarique Rahman Interview) में न केवल 'क्लीन स्वीप' का दावा किया, बल्कि अपने माता-पिता (जियाउर रहमान और खालिदा जिया) से भी बेहतर शासक बनने की कसम खाई है।
तारिक रहमान के तेवर अब पूरी तरह बदल चुके हैं। जमात-ए-इस्लामी और अन्य दलों की चुनौतियों को नजरअंदाज करते हुए उन्होंने हुंकार भरी है, "हमें सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें मिलेंगी। मुझे मौजूदा पार्टी गठबंधन के बाहर किसी नए समीकरण की जरूरत नहीं दिखती।" यह बयान इसलिए सनसनीखेज है क्योंकि अब तक माना जा रहा था कि BNP को जमात के साथ मिल कर ही चलना होगा, लेकिन तारिक ने 'एकला चलो' की राह पकड़ कर विरोधियों को चौंका दिया है।
तारिक ने शेख हसीना (Sheikh Hasina) के 15 साल के शासनकाल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 'मेगा प्रोजेक्ट्स' के नाम पर 'मेगा करप्शन' हुआ है। उन्होंने कहा, "हसीना सरकार ने कुछ लोगों को अरबपति बना दिया, लेकिन 17 करोड़ की आबादी कंगाल हो गई। देश की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और ऊर्जा सेक्टर पूरी तरह बर्बाद हो चुका है।" तारिक ने वादा किया है कि अगर वो जीतते हैं, तो उनकी पहली प्राथमिकता 'बदला लेना' नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था (Law and Order) को पटरी पर लाना होगी।
तारिक रहमान ने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में चल रहे तनाव और शेख हसीना की भारत में मौजूदगी पर बहुत ही सधे हुए शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा, "मेरे लिए जनता और देश का हित सर्वोपरि है।" यह बयान संकेत देता है कि सत्ता में आने पर वे भारत के साथ रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करेंगे, लेकिन राष्ट्रवाद से समझौता नहीं करेंगे।
इस इंटरव्यू का सबसे भावनात्मक और महत्वाकांक्षी पहलू वह था जब तारिक ने अपनी तुलना अपने पिता जियाउर रहमान और मां खालिदा जिया से की। उन्होंने कहा, "मैं उनसे भी बेहतर करने की कोशिश करूंगा।" यह एक बेटे का वादा भी है और एक नेता की महत्वाकांक्षा भी, जो यह साबित करना चाहता है कि वह सिर्फ 'वारिस' नहीं, बल्कि एक 'विजेता' है।
बहरहाल,तारिक रहमान का यह इंटरव्यू 2026 के चुनाव से पहले का 'गेम चेंजर' माना जा रहा है। उन्होंने एक तीर से कई निशाने साधे हैं-हसीना के मॉडल को खारिज किया, जमात को अपनी ताकत दिखाई और जनता को सुरक्षा का भरोसा दिया। अब देखना यह है कि क्या बांग्लादेश की जनता इस 'सुपर कॉन्फिडेंस' पर मुहर लगाती है?
तारिक के 'गठबंधन की जरूरत नहीं' वाले बयान पर जमात खेमे में खलबली है। जमात के नेताओं ने दबी जुबान में कहा है कि "अति-आत्मविश्वास घातक हो सकता है, बीएनपी को जमीनी हकीकत नहीं भूलनी चाहिए।" अवामी लीग समर्थकों का डर: हसीना के समर्थकों को डर है कि अगर बीएनपी भारी बहुमत से आई, तो बदले की कार्रवाई तेज हो सकती है, भले ही तारिक कानून के पालन की बात कर रहे हों।
क्या तारिक रहमान चुनाव प्रचार के लिए जल्द ही बांग्लादेश की धरती पर कदम रखेंगे?
भारत सरकार तारिक के इस बयान (देशहित सर्वोपरि) को कूटनीतिक रूप से कैसे लेती है?
क्या चुनाव से पहले बीएनपी और जमात के बीच गठबंधन औपचारिक रूप से टूट जाएगा?
इस पूरे इंटरव्यू के पीछे एक बड़ा और गंभीर मुद्दा छिपा हुआ है। शेख हसीना को बांग्लादेश की अदालत ने 'मानवता के खिलाफ अपराध' के लिए मौत की सजा सुनाई है और वे भारत में हैं। तारिक रहमान ने कहा है कि "अपराधियों को सजा मिलनी चाहिए।" यह भविष्य में भारत और बांग्लादेश के बीच एक बड़े कूटनीतिक टकराव की वजह बन सकता है। अगर बीएनपी सत्ता में आती है, तो 'प्रत्यर्पण' (Extradition) की मांग उठना तय है, जो भारत के लिए धर्मसंकट होगा।
Updated on:
11 Feb 2026 09:30 pm
Published on:
11 Feb 2026 07:50 pm
