
US Iran conflict: मध्य पूर्व में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहराने लगी है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की अगली रणनीति को लेकर हलचल तेज है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कथित गुप्त मुलाकात, इजरायली सेना में छुट्टियों पर रोक और युद्धस्तर की तैयारियों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या क्षेत्र में फिर व्यापक सैन्य अभियान शुरू होने वाला है, या यह किसी बड़े फैसले से पहले की रणनीतिक तैयारी है?
अमेरिकी समाचार वेबसाइट Axios की 19 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोमवार को दक्षिणी इजरायल स्थित ओव्दा एयर बेस पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। रिपोर्ट में मामले से परिचित दो सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इस बैठक के दौरान ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की संभावनाओं के बीच चर्चा हुई।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी इस अघोषित दौरे की खबर दी है। हालांकि, एजेंसी के अनुसार, पेंटागन और वाशिंगटन स्थित इजरायली दूतावास ने तत्काल इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। इसलिए बैठक के दौरान लिए गए किसी ठोस सैन्य फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिए गए घटनाक्रम के अनुसार, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने गुरुवार से सैन्यकर्मियों की छुट्टियों पर व्यापक रोक लगाने का आदेश दिया है। साथ ही, सैन्य कमान केंद्रों पर कर्मचारियों की तैनाती युद्धकालीन स्तर तक बढ़ाने और सुरक्षा सतर्कता सर्वोच्च स्तर पर रखने की बात सामने आई है।
ऐसे कदम संभावित सैन्य कार्रवाई के दौरान सैनिकों की उपलब्धता और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा सकते हैं। हालांकि, इन तैयारियों से यह अपने आप साबित नहीं होता कि हमला करने का अंतिम आदेश जारी हो चुका है।
इसी बीच ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित कोनारक नौसैनिक अड्डे को लेकर भी तनाव बढ़ा है। ईरानी पक्ष ने दावा किया कि अमेरिकी बलों ने इस सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया और दो सैनिक घायल हुए। लेकिन अमेरिकी अधिकारी ने इस दावे को गलत बताया है। लिहाजा, हमले की परिस्थितियों और नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है।
इस मुलाकात का समय भी अहम है। इजरायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होने हैं और नेतन्याहू की गठबंधन सरकार को लेकर राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में नेतन्याहू का समर्थन किया था।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वॉशिंगटन और तेल अवीव सैन्य दबाव बढ़ाकर ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करना चाहते हैं या वास्तव में व्यापक हमलों की ओर बढ़ रहे हैं। जब तक दोनों सरकारों की ओर से स्पष्ट बयान नहीं आता, तब तक इन संकेतों को संभावित सैन्य तैयारी के तौर पर ही देखना उचित होगा।