
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच अभी भी शांति समझौते पर सहमति नहीं बनी है और तनाव की स्थिति बरकरार है। अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनाव के बाद दोनों देशों के बीच फिर से जंग छिड़ सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तबाही मच जाएगी, क्योंकि अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले करता है। इस मामले पर अब ईरान की तरफ से एक बड़ा दावा किया गया है, जिस पर अमेरिका की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आ गई है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में दावा किया है कि ईरान ने पड़ोसी देशों में नागरिकों पर हमला नहीं किया। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे झूठा बता दिया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के अनुसार ईरान ने न सिर्फ पड़ोसी मिडिल ईस्टर्न देशों में नागरिकों के बुनियादी ढांचे, रिहायशी इलाकों और अन्य सुविधाओं पर जानबूझकर हमले किए हैं, बल्कि समुद्र में नाविकों को भी निशाना बनाया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के अनुसार हाल के महीनों में ईरान के इन हमलों में 20 से ज़्यादा लोगों की जान गई है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने यह भी कहा कि ईरान की यह अंधाधुंध आक्रामकता साफ तौर पर दिखाई देती है और इसे किसी भी तरह से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।
मिडिल ईस्ट में ईरान के कई पड़ोसी देश हैं जो अमेरिका के सहयोगी हैं और इन देशों में बने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल अमेरिकी सेना करती है। इन सैन्य ठिकानों पर न सिर्फ अमेरिकी सैनिक तैनात रहते हैं, बल्कि अमेरिकी फाइटर जेट्स और दूसरे कई हथियार भी रखे जाते हैं। मिडिल ईस्ट में स्थित इन सैन्य ठिकानों के ज़रिए ही अमेरिका की तरफ से ईरान पर हमले किए जाते हैं। ईरान इसके सख्त खिलाफ है और कई बार चेतावनी दे चुका है कि जो भी देश ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका की मदद करेगा, उसे ईरान के खिलाफ उठाया एक कदम माना जाएगा और उन देशों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जाएगी। इसी वजह से ईरान अपने उन पड़ोसी देशों पर हमले करता है, जो अमेरिका की मदद करते हैं।