
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच सीज़फायर भी खत्म हो गया है और शांति समझौता भी रद्द हो गया है। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने मंगलवार और बुधवार को ईरान में अलग-अलग शहरों पर हमले किए। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी कुवैत (Kuwait) और बहरीन (Bahrain) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों समेत कई जगहों पर हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत जारी रहेगी और पहले की तरह युद्ध शुरू नहीं होगा। हालांकि अभी और हमलों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी बीच ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार और बुधवार को अमेरिकी हमलों में मारे गए लोगों का आंकड़ा जारी कर दिया है।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर दो दिन किए गए हमलों में 17 लोगों की मौत हो गई। ये लोग 6 अलग-अलग शहरों पर किए गए हमलों में मारे गए।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि 6 अलग-अलग शहरों पर अमेरिकी हमलों में 115 लोग घायल भी हुए। इनमें से कई घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरान के हमले के बाद ही ट्रंप ने ईरान पर हमले की चेतावनी दे दी थी। ट्रंप फिर से युद्ध शुरू करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन उन्होंने ईरान के साथ डील करने को समय की बर्बादी बताया है।
ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी (Kazem Gharibabadi) ने अमेरिका की आक्रामकता का समर्थन करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात - यूएई (United Arab Emirates - UAE) को जवाबदेह ठहराने की मांग उठाई है। ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया पर एक दस्तावेज शेयर करते हुए लिखा, "अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने एक नया दस्तावेज़ जारी किया है जिसमें ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में समर्थन के बदले यूएई के लिए निर्यात नियंत्रण नियमों में ढील देना और उसके निर्यात दर्जे को बढ़ाने का ज़िक्र है। यह वॉशिंगटन की ओर से एक आधिकारिक स्वीकारोक्ति और अबू धाबी से जुड़ा एक विवादास्पद दस्तावेज है, जिसके लिए सीधी अंतर्राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी और कानूनी परिणाम तय होते हैं। यूएई को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।