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Iran full-Scale War Warning: तेहरान पहुंची कतर की मध्यस्थ टीम, ईरान का ऐलान- ‘पूर्ण युद्ध के लिए तैयार’

Middle East war tensions: अमेरिकी हमलों और ट्रंप के कड़े रुख से भड़के ईरान ने दोटूक कहा है कि वह झुकने के बजाय महायुद्ध के लिए तैयार है।
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भारत

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Manoj Vashisth

Jul 11, 2026

Iran Qatar latest news

Iran full-scale war warning : कूटनीति बनाम जंग: तेहरान में कतर की एंट्री, ईरान बोला- हर हाल में जवाब देंगे (फोटो सोर्स: aljazeera.com)

Iran Qatar Latest News: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) इस समय बारूद के ऐसे ढेर पर बैठा है, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी वैश्विक तबाही का सबब बन सकती है। एक तरफ जहां अमेरिकी हवाई हमलों से ईरान सुलग रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से इस तनाव को कम करने की कूटनीतिक कोशिशें भी तेज हो गई हैं। इसी सिलसिले में कतर का एक उच्च स्तरीय मध्यस्थ दल आनन-फानन में तेहरान पहुंचा है। कतर की कोशिश ईरान और अमेरिका के बीच पूरी तरह टूट चुकी बातचीत की डोर को फिर से जोड़ने की है। लेकिन, जमीनी हकीकत इस शांति प्रयास को मुंह चिढ़ा रही है।

ईरान का कड़ा रुख: अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं

तेहरान से आ रही खबरें बेहद चिंताजनक हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बखेर गालिबाफ ने साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी तरह की दबाव वाली कूटनीति (Coercive Diplomacy) के आगे घुटने नहीं टेकेगा।

ईरान कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा। अगर हालात बिगड़े, तो हम एक पूर्ण पैमाने के युद्ध (Full-Scale War) के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

ईरान की इस आक्रामकता की बड़ी वजह हाल ही में हुए अमेरिकी हवाई हमले हैं। अमेरिका ने ईरान के पांच प्रांतों में नागरिक और सैन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया था, जिसमें दर्जनों ईरानी नागरिक मारे गए और घायल हुए हैं। इसके बाद से ही तेहरान में वॉशिंगटन की नीयत को लेकर गहरा अविश्वास पैदा हो गया है।

ट्रंप के एक फैसले से बिगड़ा सारा खेल

इस पूरे विवाद की जड़ में पाकिस्तान की मध्यस्थता से बना वह समझौता (MoU) है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक झटके में एकतरफा तौर पर खत्म करने का एलान कर दिया। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका इस समझौते की शर्तों को नहीं मानता, तब तक आगे कोई बात नहीं होगी। ईरान की मुख्य मांगें तीन प्रमुख बिंदुओं पर टिकी हैं:

  • लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तुरंत पूर्ण संघर्षविराम (Ceasefire) लागू हो।
  • 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) के प्रबंधन पर ईरान के संप्रभु अधिकार को स्वीकार किया जाए।
  • ईरान को बिना किसी प्रतिबंध के अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कच्चा तेल निर्यात करने की पूरी छूट मिले।

क्यों पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है यह तनाव?

कच्चे तेल की कीमतों में आग: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी संकीर्ण रास्ते से होकर गुजरता है। अगर ईरान ने इस रास्ते को ब्लॉक किया, तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में महंगाई का नया दौर शुरू हो जाएगा।

क्षेत्रीय समीकरण और भारत की चिंता: मिडिल ईस्ट में भारत के गहरे आर्थिक हित और लाखों प्रवासी नागरिक जुड़े हैं। ईरान के साथ भारत के चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक संबंध हैं। कतर इस क्षेत्र में हमेशा से अमेरिका और ईरान के बीच एक न्यूट्रल बैक-चैनल वार्ताकार रहा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीतियों के आगे उसकी मध्यस्थता भी इस बार बेअसर साबित होती दिख रही है।

फिलहाल, गेंद पूरी तरह से अमेरिका के पाले में है। यदि कतर के दूत ईरान को थोड़ा शांत करने में कामयाब रहे, तो शायद युद्ध टल जाए; वरना मिडिल ईस्ट का यह 'प्रॉक्सी वॉर' जल्द ही एक सीधे और भयानक विश्वव्यापी संकट में बदल सकता है।