
Saudi Arabia Travel Advisory: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब को लेकर अपनी यात्रा सलाह में बदलाव किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब के लिए ट्रैवल एडवाइजरी को Level-3 यानी ‘यात्रा पर पुनर्विचार करें’ कर दिया है। अमेरिका ने ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों, सशस्त्र संघर्ष, आतंकवाद और कुछ अन्य जोखिमों को लेकर नागरिकों को सावधान किया है। वहीं, पड़ोसी यमन के लिए Level-4 यानी ‘यात्रा न करें’ की सलाह अभी भी लागू है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी ट्रेवल गाइडलाइन में बदलाव किया है। अब सऊदी अरब को 'लेवल 3' यानी "यात्रा पर पुनर्विचार करें" की श्रेणी में डाल दिया गया है। इसका मतलब है कि अमेरिकी नागरिकों को बहुत जरूरी काम होने पर ही वहां जाने की सलाह दी गई है। अमेरिका का कहना है कि यमन से होने वाली जंग के कारण सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में जारी सशस्त्र संघर्ष, आतंकवाद और हिंसा की बढ़ती गतिविधियों के साथ-साथ सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्त स्थानीय कानूनों व देश से बाहर निकलने पर लगने वाले कानूनी प्रतिबंधों के जोखिम को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। वहीं यमन और उससे लगे इलाकों के लिए अमेरिका ने 'लेवल 4' जारी कर रखा है, जिसका सीधा मतलब है- 'वहां बिल्कुल न जाएं'।
वहीं दूसरी तरफ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इजरायल के लिए 2.8 अरब डॉलर (लगभग 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक) के रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने में जुटा है। हालांकि इस डील का आधिकारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस को इसके बारे में अनौपचारिक रूप से सूचित कर दिया गया है।
इस पूरे पैकेज में मुख्य रूप से 907 किलोग्राम (2,000 पाउंड) वजन वाले 40,000 शक्तिशाली बम शामिल हैं। इनमें 20,000 'Mk84' हाई-एक्सप्लोसिव फ्री-फॉल बम और 20,000 'BLU-117' बम शामिल किए जाने की योजना है, जिनका उपयोग अमेरिकी नौसेना करती है। ये बम इतने खतरनाक हैं कि जमीन के अंदर गहराई में बने बंकरों को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं और जमीन के ऊपर भारी तबाही मचा सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्तावित सौदे का अधिकांश भुगतान अमेरिकी 'फौरन मिलिट्री फाइनेंसिंग' (FMF) कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। इसके तहत अमेरिकी करदाताओं के पैसे से मिलने वाली वित्तीय मदद के जरिए ही इजरायल, अमेरिका से ये घातक हथियार खरीदेगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हथियारों की बिक्री पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जा रही है।