Russia Ukraine War: अमेरिका ने कहा कि वो नहीं चाहता कि ये युद्ध सालों तक चला रहे और पूरे यूरोप में संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाए।
Russia Ukraine War: 3 साल से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध शायद अब खत्म होने की राह पर चले पड़े। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि अमेरिका इस युद्ध को खत्म कराने के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रहा है। जर्मनी में बीते शुक्रवार से शुरू हुए 61वें सुरक्षा सम्मेलन में यूक्रेन शांति वार्ता के लिए एक बड़ी बैठक हुई थी। जिसमें यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल थे। युद्ध समाप्त करने को लेकर वेंस (JD Vance) ने कहा कि अमेरिका अब स्थाई शांति को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि अमेरिका नहीं चाहता कि यूरोप में ये अशांति सालों तक चले।
बैठक में वेंस ने ये भी कहा कि आने वाले दिनों में शांतिवार्ता के लिए और बड़ी कदम उठाए जाएंगे और कई फैसले लिए जाएंगे। वहीं यूक्रेन की तरफ से युद्ध खत्म करने की अमेरिका की कोशिशों पर कहा कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ ये यूक्रेन की पहली बैठक थी ना कि आखिरी! उन्हें यकीन है कि दोनों देश जल्द ही शांति की तरफ बढ़ेंगे। ज़ेलेंस्की ने ये भी कहा कि कुछ दिन बाद अमेरिका के राजदूत यूक्रेन का दौरा करेंगे।
NBC की रिपोर्ट के मुताबिक इस शांतिवार्ता को लेकर ज़ेलेंस्की (Ukraine US Meeting in Germany) ने कहा कि यूक्रेन सिर्फ शांति चाहता है वो युद्ध नहीं चाहता। अमेरिका के समर्थन के बिना यूक्रेन बच ही नहीं सकता। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध में यूक्रेन को अकेला छोड़ रहे हैं लेकिन डोनाल्ड ट्रंप से जब उनकी फोन पर बात हुई थी तो ऐसा कुछ लगा नहीं बल्कि ट्रंप ने तो ज़ेलेंस्की को अपना पर्सनल फोन नंबर तक दे दिया था।
हालांकि ज़ेलेंस्की को इस बात का भी डर है कि कहीं अमेरिका उसे नाटो से बाहर ही रखने का फैसला ना दे दें। क्योंकि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के प्रमुथ पीट हेगसेथ ने यूक्रेन को नाटो में शामिल ना करने का संकेत दे दिया था।
बता दें कि जर्मनी के म्युनिख में 14-16 फरवरी तक सुरक्षा सम्मेलन आयोजित हुआ है। जिसमें यूक्रेन रूस युद्ध शांतिवार्ता पर भी चर्चा हो रही है। इस कार्यक्रम में 60 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रमुख, 150 मंत्री, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के नेता शामिल हो रहे हैं। इस कार्यक्रम में युद्ध, जलवायु संकट, शासन, क्षेत्रीय संघर्ष भी शामिल हैं।