
US Withdrew 10 F-22 Stealth Fighter Jets from Israel: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बावजूद, अमेरिकी सेना ने शनिवार सुबह दक्षिणी इजरायल की वायु सेना के नेवातिम और ओवडा एयरबेस से अपने 10 एडवांस्ड 10 F-22 स्टील्थ फाइटर जेट्स वापस बुला लिए। ये जेट यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका वापस भेज दिए और अब यूके के आएएफ फेयरफोर्ड में तैनात किए गए हैं। मीडिया रिपोटर्स के अनुसार सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए फुटेज में इन जेट्स को ब्रिटिश एयरबेस पर उतरते हुए देखा जा सकता है। इजरायल से ये विमान हटाने के यूं तो कई कारण बताए जा रहे हैं। आइए इन कारणों पर नजर डालते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह कदम दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य बलों की रणनीतिक तैनाती का हिस्सा कहा जा रहा है, मगर अंदर की बात कुछ और लग रही है। ट्रंप प्रशासन तुर्की को अमेरिकी F-35 फाइटर जेट्स की बिक्री पर लगी रोक हटाने पर विचार कर रहा है। इजरायल के अधिकारी तुर्की को जेट विमान बेचने की संभावना का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और इजरायल की हवाई श्रेष्ठता को खतरा होगा।
एक कारण यह भी बताया गया है कि मिडिल ईस्ट में कुछ नीतियों को लेकर अमेरिकी प्रशासन और इजरायल की नेतन्याहू सरकार के बीच मतभेद सामने आए हैं, शायद यही वजह है कि अमेरिका ने अपने विमान वापस बुलाना शुरू कर दिए हैं और आक्रामक युद्धकालीन सैन्य रुख से हट कर वह शांतिपूर्ण नीति अपना रहा है।
एक वजह यह सामने आई है कि अमेरिका ने मुख्य रूप से ईरान के साथ हालिया संघर्ष के दौरान इजरायल की सुरक्षा और ऑपरेशन्स में मदद के लिए ये विमान तैनात किए गए थे। ईरान के साथ युद्धविराम और तनाव कम होने के बाद, इन अतिरिक्त विमानों की तत्काल आवश्यकता नहीं रह गई थी।
एक तर्क यह दिया जा रहा है कि पर्यटन फिर शुरू होने की वजह से अमेरिका ने इजराइल के बेन गुरियन जैसे आम नागरिकों के इस्तेमाल वाले हवाई अड्डों पर भीड़ कम करने के लिए अमेरिकी ट्रांसपोर्टेशन सेक्रेटरी रे लाहूड और सिविल एविएशन अधिकारियों ने इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट को अमेरिकी सैन्य सहायता ऑपरेशन्स से मुक्त कर दिया है, जिससे इस टर्मिनल का आम नागरिकों की यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच जून में एक समझौता हुआ था, जिसकी वॉशिंगटन ने पहल की थी, इसका मकसद दोनों देशों के बीच स्थायी शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए इस इलाके में सैन्य मौजूदगी कम करना था। इन विमानों को हटाने से उस समझौते की भी पालना हो गई।
बहरहाल इजरायल से इन अमेरिकी जेट्स की वापसी ऐसे समय में हुई है जब जियोपॉलिटिकल हालात नाजुक बने हुए हैं। ईरान के साथ तनाव कम करने की कोशिशों के बीच जून में अतिरिक्त विमानों की संख्या बहुत कम कर दी गई थी। इस बीच, वॉशिंगटन और यरूशलम के बीच तुर्की को लेकर रक्षा संबंधों में राजनीतिक खींचतान को भी इजरायल से अमेरिकी जेट विमानों को हटाने का एक कारण माना जा रहा है।