डूम्सडे क्लॉक (प्रलय की घड़ी) ने 27 जनवरी 2026 को आधी रात से सिर्फ 85 सेकंड पहले सेट की गई है। यह इतिहास में सबसे करीब है।
मानवता पर मंडरा रहे खतरों को भांपने वाली दुनिया की सबसे चर्चित घड़ी 'डूम्सडे क्लॉक' ने इस साल एक डरावना संकेत दिया है।
वैज्ञानिकों ने इसे आधी रात के 90 सेकंड से घटाकर 85 सेकंड पर कर दिया है, जिसका मतलब है कि हम वैश्विक तबाही के इतिहास में अब तक के सबसे करीब हैं। वैज्ञानिकों ने इस साल हुई कई बड़ी घटनाओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।
इसकी स्थापना 1945 में अल्बर्ट आइंस्टीन और रॉबर्ट ओपेनहाइमर जैसे महान वैज्ञानिकों ने की थी। यह घड़ी परमाणु हथियारों और जलवायु परिवर्तन जैसे मानव-निर्मित खतरों से दुनिया को आगाह करने का एक प्रतीकात्मक तरीका है। इसमें 'आधी रात' का मतलब दुनिया का अंत है। सुइयां जितनी करीब होंगी, खतरा उतना ही बड़ा होगा।
युद्ध का उन्माद- रूस-यूक्रेन का न थमने वाला युद्ध, इजरायल-गाजा संघर्ष के अलावा अमरीका और इजरायल के ईरान पर हमलों ने 'तीसरे विश्व युद्ध' की आशंका को हवा दी है।
बेकाबू होती एआइ- बिना रेगुलेशन विकसित हो रही एआइ तकनीक मानव अस्तित्व के लिए खतरा है। 'डीपफेक' वीडियो के जरिए दंगों और युद्ध की झूठी खबरें फैलाकर सार्वजनिक अशांति पैदा की जा रही है।
जलवायु परिवर्तन- ग्लोबल वार्मिंग के कारण सूखे, हीटवेव और बाढ़ की स्थिति बदतर हुई है। साथ ही, जीवाश्म ईंधन के बढ़ते उपयोग की नीतियों ने आग में घी का काम किया है।
जैविक खतरे- कोरोना और बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की कमी ने भी वैज्ञानिकों को डराया है।
प्रलय की घड़ी की शुरुआत जब से हुई है, तब से अब तक इसकी सेटिंग 27 बार बदली जा चुकी है. खास बात यह है कि यह कभी मिडनाइट तक नहीं पहुंची है, लेकिन कई बार बहुत करीब आई है।