
Akshaya Tritiya Par Kya Karna Chahie: ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि यानी अक्षय तृतीया तिथि चिरंजीवी तिथि है, क्योंकि इसी तिथि पर भगवान विष्णु के अवतार परशुराम जी का जन्म हुआ था। परशुरामजी जी चिरंजीवी माने जाते हैं यानी ये सदैव जीवित रहेंगे। इनके अलावा भगवान विष्णु के नर-नरायण, हयग्रीव अवतार भी इसी तिथि पर प्रकट हुए थे।
ज्योतिषी शर्मा के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया 30 अप्रैल को है। पंचांग के अनुसार अबकी बार अक्षय तृतीया सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी। सर्वार्थ सिद्धि योग का सीधा संबंध मां लक्ष्मी से बताया गया है। इस शुभ योग में पूजा करने से मां लक्ष्मी आपकी हर इच्छा पूरी करती हैं। साथ ही इस योग में स्वर्ण आभूषण की खरीद करने से उसमें अक्षय वृद्धि होती है।
इसे अक्षय तृतीया और आखा तीज कहा जाता है। इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। ग्रंथों के मुताबिक इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी। इस दिन किया गया जप, तप, ज्ञान, स्नान, दान, होम आदि अक्षय रहते हैं। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।
ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा ने बताया कि इसी दिन बद्रीनाथ धाम के पट खुलते हैं। अक्षय तृतीया पर तिल सहित कुश के जल से पितरों को जलदान करने से उनकी अनंत काल तक तृप्ति होती है।
इस तिथि से ही गौरी व्रत की शुरुआत होती है, जिसे करने से अखंड सौभाग्य और समृद्धि मिलती है। अक्षय तृतीया पर गंगास्नान का भी बड़ा महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।
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ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा ने बताया कि इस शुभ पर्व पर तीर्थ में स्नान करने की परंपरा है। ग्रंथों में कहा गया है कि अक्षय तृतीया पर किया गया तीर्थ स्नान जाने-अनजाने में हुए हर पाप को खत्म कर देता है। इससे हर तरह के दोष खत्म हो जाते हैं। इसे दिव्य स्नान भी कहा गया है।
तीर्थ स्नान न कर सकें तो घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर नहा सकते हैं। ऐसा करने से भी तीर्थ स्नान का पुण्य मिलता है। इसके बाद अन्न और जलदान का संकल्प लेकर जरुरतमंद को दान दें। ऐसा करने से कई यज्ञ और कठिन तपस्या करने जितना पुण्य फल मिलता है।
ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा ने बताया कि अक्षय तृतीया पर घड़ी, कलश, पंखा, छाता, चावल, दाल, घी, चीनी, फल, वस्त्र, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा और दक्षिणा सहित धर्मस्थान या ब्राह्मणों को दान करने से अक्षय पुण्य फल मिलता है। अबूझ मुहूर्त होने के कारण नया घर बनाने की शुरुआत, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा जैसे शुभ कामों के लिए भी ये दिन खास माना जाता है।
अक्षय तृतीया पर पूजा, दान से कई गुना अधिक फल मिलता है। मान्यता है कि नवग्रह शांति के लिए विशेष चीजों का दान करें तो ग्रह दोष कम होता है। आइये जानते हैं नवग्रह शांति के लिए क्या दान करें
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ग्रहों के राजा सूर्य की कुंडली में स्थिति कमजोर होने पर व्यक्ति के मान-सम्मान, धन-दौलत में गिरावट आती है। इन्हें मजबूत करने के लिए अक्षय तृतीया पर लाल कपड़ा, गेहूं, गुड़, दूध, तांबा, घी, सत्तू, मसूर दाल आदि का दान करना चाहिए। इससे घर में सुख-शांति आती है।
ग्रहों के राजकुमार बुध को कुंडली में मजबूत करने के लिए अक्षय तृतीया पर चांदी, कांसा का बर्तन, हरा वस्त्र, मूंग की दाल, हरी सब्जियों का दान सकारात्मक फल देता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यापार, नौकरी में वृद्धि होती है। इसके साथ ही बुद्धि और एकाग्रता बढ़ती है।
कुंडली में ग्रहों के सेनापति मंगल की स्थिति को मजबूत करने के लिए अक्षय तृतीया पर लाल वस्त्र, मसूर की दाल, लाल चंदन, मिठाई, लाल फूल, ताम्रपत्र, मिट्टी का घड़ा दान करना शुभ फल देता है। इससे साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही कर्ज से छुटकारा मिलता है।
देवताओं के गुरु बृहस्पति की स्थिति कुंडली में मजबूत करने के लिए इस दिन पीले वस्त्र, मिठाई, केला, घी, चने की दाल का दान करना शुभ होता है। ऐसा करने से जातक को सुख-समृद्धि मिलती है। इसके साथ ही जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
कुंडली में शुक्र को मजबूत करने के लिए सफेद चीजें जैसे दूध, दही, शक्कर, खरबूज, सत्तू, पानी, सफेद चंदन, इत्र का दान करना चाहिए। इससे लव लाइफ और दांपत्य जीवन में खुशियां बनी रहती है। इससे धन-संपदा भी मिलती है।
दंडाधिकारी शनि की कृपा पाने के लिए अक्षय तृतीया पर काले तिल, सरसों का तेल, वस्त्र, अन्न, काला छाता आदि का दान करें। इससे कुंडली में शनि दोष, साढ़े साती का नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
अक्षय तृतीया पर दूध, दही, शक्कर, खीर, मोती, शंख, सफेद कपड़ा जैसी चीजें दान करनी चाहिए। इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थित मजबूत होती है और मन शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है। साथ ही गुस्सा नियंत्रित होता है।